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मुआवजा उठाने के बाद भी धरना- प्रदर्शन पर अडिग हैं किसान

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मुआवजा उठाने के बाद भी धरना-प्रदर्शन पर अडिग हैं किसान
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संवाद न्यूज एजेंसी
शामली। दिल्ली-देहरादून इकोनॉमिक कॉरिडोर की जद में 22 गांवों का आंदोलन चलाने वाली किसान संघर्ष समिति के अध्यक्ष और सचिव समेत कई पदाधिकारी एक्सप्रेसवे की जद में प्रभावित भूमि का मुआवजा उठा चुके हैं। मुआवजा उठाने के बाद बुटराड़ा बस अड्डे पर धरना-प्रदर्शन कर बढ़ा मुआवजा के लिए अडिग है।
दिल्ली के अक्षरधाम से शुरू होकर बागपत के ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे से बागपत, मुजफ्फरनगर-शामली, सहारनपुर जिले से होता हुआ देहरादून तक छह लेन दिल्ली-देहरादून इकोनॉमिक कॉरिडोर प्रस्तावित है। इस एक्सप्रेसवे की जद में आ रही भूमि का मुआवजा बढ़ाने की मांग को लेकर किसान संघर्ष समिति गठित है। समिति लगभग दो सालों से आंदोलन कर रही है। जिला प्रशासन सर्किल रेट बढ़ाकर न देने की बात पहले ही स्पष्ट कर चुका है। पिछले माह की 28 जुलाई से किसान संघर्ष समिति के आह्वान पर किसान बुटराड़ा में धरना-प्रदर्शन कर रहे हैं।
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उधर, एडीएम संतोष कुमार सिंह ने किसान संघर्ष समिति के अध्यक्ष ठाकुर वीर सिंह, सचिव विदेश सिंह मलिक, सदस्य बिजेंद्र कुमार समेत कई पदाधिकारियों की सूची जारी कर मुआवजा उठाने का दावा किया है। उनका कहना है कि एक्सप्रेसवे में प्रभावित रकबे का भुगतान सर्किल रेट के आधार पर मुआवजा राशि को अपने बैक खातों में डीबीटी के माध्यम से प्राप्त कर लिया है। एडीएम के मुताबिक विदेश मलिक अपनी खसरा नंबर-26 के रकबा वर्ग मीटर 862 रकबा नबर-95 का अर्जित रकबा 4068 और समिति अध्यक्ष वीर सिंह खसरा नंबर-165 अर्जित रकबा वर्ग मीटर 8596 का मुआवजा ले चुके हैं।
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मुआवजा बढ़ाने की मांग को लेकर कर रहे आंदोलन
किसान संघर्ष समिति के सचिव विदेश मलिक का कहना है कि दिल्ली-देहरादून इकोनॉमिक कॉरिडोर एक्सप्रेसवे की जद में आए 90 प्रतिशत किसान मुआवजा उठा चुके हैं। बुटराड़ा गांव में उनका धरना-प्रदर्शन और आंदोलन बढ़े हुए सर्किल रेट को लेकर किया जा रहा है।
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