शामली। दो माह की लंबी पड़ताल और बयान दर्ज करने के बाद जलालाबाद के ऐतिहासिक किले के संबंध में जिला प्रशासन ने रिपोर्ट तैयार कर ली है। इस किले में रह रहे जलालाबाद के विधायक अशरफ अली को भी साक्ष्य सहित बयान दर्ज कराने को नोटिस भेजा गया था लेकिन समय लेने के बाद भी वह बयान दर्ज कराने नहीं पहुंचे। एसडीएम का कहना है कि वह जल्द अपनी रिपोर्ट डीएम को भेज देंगे।
उत्तर प्रदेश पुरातत्व विभाग लखनऊ की निदेशक रेनू द्विवेदी ने 29 अक्तूबर 2024 को जलालाबाद किले को उत्तर प्रदेश राज्य सरकार की ओर से संरक्षण में लिए जाने की संस्तुति की थी। इस संबंध मेंं डीएम को पत्र भेजकर रिपोर्ट तलब की थी। पुरातत्व विभाग ने संबंधित खसरा खतौनी, नजरी नक्शा, राजस्व नक्शा प्रस्तावित भूमि की सीमाओं की गाटा संख्या से संबंधित रकबा आदि अभिलेख भिजवाने का अनुरोध किया था।
पुरातत्व विभाग के निर्देश पर एसडीएम सदर ने मनाहर वंश के सहारनपुर जिले के गांव भावसी, भारी दीनदारपुर और कांशीपुर गांव में जाकर ग्रामीणों के बयान दर्ज किए थे। एसडीएम के नोटिस के बाद मनिहारखेड़ा वंश के भानू प्रताप सिंह, भावसी रायपुर के भूपेंद्र सिंह, रामकिशन सिंह, श्रीपाल, मोहर सिंह, राकेश पुंडीर, दुष्यंत सिंह, काशीपुर के कुंवर पाल सिंह और राजपूतों की वंशावली लिखने वाले दौसा राजस्थान के लेखक गिरवर सिंह के भी बयान भी लिए थे।
एसडीएम सदर ने बताया कि थानाभवन के विधायक को नोटिस जारी करके बयान दर्ज करने के लिए पांच फरवरी को बुलाया था। विधायक ने बीस फरवरी तक समय मांगा गया था। बीस फरवरी को विधायक साक्ष्य और बयान दर्ज नहीं करा पाए हैं। किले की रिपोर्ट तैयार है।े