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Shamli News: बच्चों में फैला खसरा का प्रकोप, अस्पतालों में पहुंच रहे मरीज

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- ज्यादातर पीड़ित बच्चों को नहीं लगा खसरा का टीका
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- स्वास्थ्य विभाग के टीकाकरण के दावे की खुली पोल



संवाद न्यूज एजेंसी

शामली। जिले में खसरा का प्रकोप चल रहा है। अस्पतालों में रोजाना खसरा से पीड़ित बच्चे उपचार के लिए आ रहे हैं। इस रोग से पीड़ित अधिकांश बच्चे ऐसे हैं, जिन्हें खसरा का टीका नहीं लगा है। इससे स्वास्थ्य विभाग के टीकाकरण करने के दावे की भी पोल खुली है। चिकित्सकों का कहना है कि झाड़ फूंक के चक्कर में न पड़कर समय रहते चिकित्सक की सलाह से उपचार कराना चाहिए। इसमें लापरवाही भारी पड़ सकती है।

सरकारी और निजी अस्पतालों में खसरे के मरीज सामने आ रहे हैं। ज्यादातर आठ साल तक के बच्चों में खसरा रोग देखा जा रहा है। चिकित्सकों का कहना है पिछले सालों के मुकाबले इस बार खसरा के मरीज ज्यादा आ रहे हैं। जो बच्चे खसरे की चपेट में आ रहे हैं, उनमें अधिकतर ऐसे बच्चे हैं, जिन्हें खसरे का टीका नहीं लगा है। सीएचसी के बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. उपकार मलिक ने बताया कि खसरा से पीड़ित एक-दो बच्चे रोजाना आ रहे हैं। पिछले महीने में इस बीमारी से पीड़ित बच्चे ज्यादा आ रहे थे। ज्यादातर बच्चे वे होते हैं जिन्हें खसरे का टीका नहीं लगा है।
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उन्होंने बताया कि जिन बच्चों को टीका लगा है, उन्हें खसरा होने की संभावना बहुत कम होती है। अगर किसी को खसरा हो जाता है,तो उन बच्चों में इसका प्रभाव बहुत कम होता है। इसलिए बच्चों को टीकाकरण कराना चाहिए। सभी सरकारी अस्पतालों में बच्चों को टीकाकरण नि:शुल्क किया जाता है। आईएमए के पूर्व अध्यक्ष बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. अकबर खान ने बताया कि उनके यहां रोजाना चार-पांच बच्चे खसरा से पीड़ित आ रहे हैं। पिछले सालों के मुकाबले इस बार खसरे के मरीज ज्यादा है। ज्यादातर बच्चे वे हैं जिन्हें खसरे का टीका नहीं लगा है। या फिर वे शारीरिक रूप से कमजोर होते हैं। अधिकतर बच्चों के परिजन पहले झाड़ फूंक से इलाज कराने की कोशिश करते हैं। जब उनकी स्थिति गंभीर हो जाती है तब उसे लेकर चिकित्सक के पास पहुंचते हैं।
उनका कहना है कि अगर किसी बच्चे को खसरा के लक्षण नजर आते हैं तो झाड़ फूंक के चक्कर में न पड़े और योग्य प्रशिक्षित चिकित्सक की सलाह से उपचार कराएं। इसमें लापरवाही नहीं बरतनी चाहिए, वरना यह खतरनाक हो सकती है। जिन बच्चों को खसरा होता है, उन्हें अगले छह माह तक शरीर में ताकत नहीं बन पाती, जिससे बच्चे को अन्य बीमारियां होने की भी आशंका रहती है। इसलिए बच्चों को पौष्टिक भोजन खिलाना चाहिए और समय पर बच्चों को नियमित टीकाकरण अवश्य कराएं।
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लक्षण:

तेज बुखार होना।



मुंह लाल होना।

शरीर पर लाल भूरे रंग के दाने होना।



आंखें लाल और सूजन होना।

जुकाम, खांसी होना और मुंह में छाले होना।



बचाव:



बच्चों में नियमित टीकाकरण अवश्य कराएं।

पौष्टिक आहार खिलाएं।



झाड़ फूंक के चक्कर में न पड़े।

चिकित्सक की सलाह से समय रहते उपचार कराएं।



खसरा से पीड़ित बच्चे को दूसरे बच्चों से अलग रखें।

कोट

बच्चों को खसरा समेत कई जानलेवा बीमारियों से बचाव के लिए सभी स्वास्थ्य केंद्रों पर निशुल्क टीकाकरण किया जाता है। स्वास्थ्य विभाग की तरफ से समय समय पर जागरूकता अभियान चलाया जाता है ताकि सभी बच्चों को शत-प्रतिशत टीकाकरण हो सके और कोई बच्चा टीकाकरण से वंचित न रहे। - डॉ. आरके सागर, जिला प्रतिरक्षण अधिकारी।
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