- ओपीडी में अधिकतर चिकित्सक मिले गायब, जो आए थे, वे समय से पहले छोड़ जाते हैं कुर्सी
संवाद न्यूज एजेंसी
शामली। जिला संयुक्त चिकित्सालय में चिकित्सक न मिलने से मरीजों को इलाज के लिए भटकना पड़ रहा है। ओपीडी में मरीज कई-कई घंटे तक चिकित्सकों की इंतजार में उनके कक्ष में खाली पड़ी कुर्सी की तरफ देखने को मजबूर रहते हैं। ओपीडी में अधिकतर चिकित्सक नदारद रहते हैं, जो आते हैं वे समय से पहले चले जाते हैं।
जिला संयुक्त चिकित्सालय में मरीजों को इलाज के लिए चिकित्सकों का इंतजार करना पड़ता है। जिला अस्पताल में लगभग 12 चिकित्सकों की तैनाती है, लेकिन ओपीडी में अधिकतर चिकित्सक गायब मिलते हैं। जो चिकित्सक ओपीडी में आते हैं, वे भी ज्यादातर समय इधर-उधर रहते है और दोपहर दो बजे से पहले ही चले जाते हैं। इस कारण मरीजों को इलाज के लिए कई घंटे तक चिकित्सकों का इंतजार करना पड़ता है।
शुक्रवार को भी जिला अस्पताल का यहीं हाल देखने को मिला दोपहर एक बजे ओपीडी में एक-दो चिकित्सक को छोड़कर ज्यादातर गायब थे और उनकी कुर्सी खाली थी। मरीज इलाज के लिए इधर उधर भटकते मिले। परेशान होकर कई मरीजों ने ओपीडी में चिकित्सक न होने की शिकायत सीएमएस डॉ. अंजू जोधा से भी की, लेकिन उनकी समस्या का समाधान नहीं हो सका।
झिंझाना क्षेत्र के गांव अलीनगर निवासी 52 वर्षीय रामभजन कक्ष नंबर 15 के बाहर कक्ष पर बैठा था। उससे बात की गई तो उसने बताया कि चोट लगने से उसकी कमर में दर्द है। वह सुबह दूसरे कक्ष में चिकित्सक को दिखाने गया तो उसने इस कक्ष में बैठने वाले चिकित्सक को दिखाने के लिए कहा। वह लगभग तीन घंटे से चिकित्सक की इंतजार कर रहा है।
गांव ताना निवासी संदीप ने बताया कि उसे पेट की समस्या है, लेकिन जिला अस्पताल में कोई चिकित्सक नहीं है, जिसे वह अपनी समस्या बता सके। वह एक घंटे से ज्यादा समय से चिकित्सक की इंतजार कर रहा है।
गांव ताना निवासी अंकित खैवाल ने बताया कि वह एक घंटे से अस्पताल में इलाज के लिए आया हुआ है। यहां कोई चिकित्सक नहीं है, जिस कारण वे इलाज न मिलने से परेशान है।
विनय कुमार ने बताया कि उसे आंख में समस्या है। वह अस्पताल में आंख दिखाने के लिए आए थे। यहां चिकित्सक नहीं मिले। चिकित्सक न मिलने पर वे सीएमएस से भी मिले। उन्होंने भी कोई संतोषजनक जवाब नहीं दिया। इसी तरह बुखार के कई मरीज भी चिकित्सकों की इंतजार करते हुए मिले।
कोट
जिला अस्पताल में विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी है। इसके लिए शासन को कई बार पत्राचार किया जा चुका है। उपलब्ध चिकित्सकों व संसाधनों से मरीजों को बेहतर उपचार दिलाया जा रहा है। - डॉ. अंजू जोधा, सीएमएस।
संजीव शर्मा