शामली। अक्तूबर और नवंबर माह में मैंगो मिली बग कीट आम की फसल को अधिक नुकसान पहुंचा सकता है। किसानों की जरा सी लापरवाही से फसल बर्बाद होने के कगार पर पहुंच सकती है। कृषि वैज्ञानिक और विशेषज्ञ जिले के किसानों को बचाव की सलाह दे रहे हैं।
जिला कृषि विज्ञान केंद्र प्रभारी डॉ. संदीप चौधरी, सह निदेशक उद्यान डाॅ. ओमकार सिंह ने बताया कि जिले में 2100 हेक्टेयर क्षेत्र में आम की खेती की जाती है। आम के बाग के दौरान तीन बिंदुओं कटाई, छटाई, पोषक तत्व प्रबंधन और कीट प्रबंधन की आवश्यकता होती है।
फसल में कीट का प्रकोप कम हो, इसके लिए फल तुड़ाई के उपरांत या फिर अक्तूबर से दिसंबर तक पौधों की छटाई कर देनी चाहिए और जो शाखाएं रोगग्रस्त है या किसी कारणवश सूख गई है, उन्हें काट देना चाहिए। कटे भागों पर कॉपर आक्सीक्लोराइड का पोस्ट लगाना चाहिए।
पोषक तत्व प्रबंधन के लिए मुख्य पोषक तत्व नाइट्रोजन, फास्फोरस, पोटाश एवं सुक्ष्य पोषक तत्व कॉपर, जिंक, बोरोन एवं गोबर की खाद तीनों का उपयोग करना आवश्यक है। दस वर्ष या उससे अधिक आयु के आम के पौधे के लिए 50 किलोग्राम गोबर की खाद, 1.53 किलोग्राम यूरिया, 1.63 किग्रा. डीएपी , 1.25 म्यूरेट ऑफ पोटाश, 250 ग्राम कॉपर सल्फेट, 250 ग्राम बोरेक्स, 250 ग्राम जिंक सल्फेट की दर से प्रति वर्ष प्रति पौधा प्रयोग करनी चाहिए।
कीट प्रबंधन के लिए अक्तूबर और नवंबर माह में आम में मैंगो मिली बग कीट लगने की संभावना अधिक रहती है। रोकथाम के लिए आम के पेड़ के तनों के चारों ओर भूमि से डेढ़ फुट ऊपर और 15 डेढ़ फुट ऊंचाई तक पॉलिथीन शीट लपेटकर कसकर बांध देते हैं। और दोनों किनारों पर ग्रीस लगा देते हैं ताकि कीट का लार्वा या व्यस्त कीट ऊपर न चढ़ सके।