शामली के कैराना कस्बे के जिस छड़ियान इलाके में आधी रात तक रौनक रहती थी, लेकिन रविवार रात को 8 बजे ही वहां सन्नाटा पसरा था। सड़क हादसे में तीन लोगों की मौत के गम में व्यापारियों ने दुकानें बंद कर दी थीं। मृतक के घरों से चीख पुकार की आवाज रात के सन्नाटे को चीर रही थीं।
कस्बे का छड़ियान मोहल्ला मेरठ-पानीपत हाईवे पर है। इसमें अधिकतर कुरैशी बिरादरी के लोग रहते हैं। इन लोगों का पेशा पशु कारोबार था लेकिन धीरे धीरे अधिकतर लोग कपडे़ के काम में आ गए । इस क्षेत्र के सैकड़ों लोग हरियाणा के गुड़गांव, गोहाना, बंगलूरू, आदि कई राज्यों में रहकर कपड़े की फेरी का काम करते हैं। मोहल्ले में आधी रात तक दुकानें खुलती हैं और खासी चहल पहल होती है लेकिन रात को जैसे ही हादसे में मोहल्ले के तीन लोगों की मौत की खबर पहुंची दुकानें बंद होनी शुरू होई। बाजार सूने हो गए और लोग पीड़ितों के यहां पहुंचने शुरू हो गए । रात नौ बजे के बाद रिश्तेदारों का भी आना शुरू हो गया। महिलाएं बुरी तरह चीख पुकार कर रही थीं।
बुजुर्गों को सच्चाई बताने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे थे लोग
कैराना। हादसे में मौत की खबर आने के बाद भी लोग घर के बुजुर्गों को इसी सूचना देने से कतरा रहे थे। परिवार के बुजुर्गों को देर रात तक यही बताया गया था कि वे एक्सीडेंट में घायल हैं, लेकिन देर रात तक सच्चाई उनके सामने आ गई तो उनका भी बुरा हाल था। परिवारों में चीख पुकार मची थी।
पिता का साया पहले ही उठ गया था
हादसे में मारा गया सुहेल का परिवार पहले कैराना कस्बे में कोतवाली के पीछे रहते थे। उनके पूर्व पड़ोसियों ने बताया कि सुहेल के पिता बस चालक थे। सुहेल अविवाहित था और दिहाड़ी मजदूरी का काम करता था । बाद में ये परिवार शामली के कलंदरशाह मोहल्ले में जाकर बस गया था। सुहेल छड़ियान मोहल्ले के युवकों के साथ ही गोहाना में काम करता था।
नमाज पढ़कर बोली मां बेटी ठीक होकर लौटेगा
कैराना। एडीएम शामली की सूची में हासिम सात भाई हैं। ये तीसरे नंबर का है। पिता सोनीपत के समालखा में बर्तनों की फेरी करता है। बाकी भाई गाड़ी की मरम्मत और बाकी कपड़े की फेरी करते हैं। घर कि अधिकतर पुरुष सदस्य भिवानी गए हुए थे। घर में उसकी मां थी । परिजनों का कहना था कि उनका बेटा घायल है। मां रुखसाना देर रात घर में नमाज पढ़ रही थी। पूछने पर
बोली अल्लाह पर भरोसा है। मेरा बेटा ठीक होकर लौटेगा।
शबनूर के परिवार के साथ पूरा पंजीठ गांव
पंजीठ गांव के ग्राम प्रधान इरशाद ने बताया कि हादसे में मारे गए शबनूर के पिता की मृत्यु हो चुकी है। ये बेहद गरीब परिवार का है। परिवार के नाम कोई जमीन नहीं है। ये तीन भाई है और तीनों में शबनूर सबसे छोटा है। सबनूर की शादी हो चुकी है और दो छोटे बच्चे हैं। ये पानीपत कैराना रोड पर किसी की जीप पर चालक की नौकरी करता था।सबका चहेता था। इस हादसे से पूरा परिवार दुखी है। पूरा गांव परिवार के साथ है और हर संभव मदद करेगा। प्रशासन को भी इसकी आर्थिक मदद करनी चाहिए ।
दो बच्चों के सिर से उठा पिता का साया
हादसे में मारे गए सरवेज निवासी अकबरपुर सुन्हेटी का है। ग्राम प्रधान दाउद अली के अनुसार सरवेज तीन भाईयों में सबसे बड़ा था। उसकी शादी हो चुकी थी। दो बच्चे थे। पिता के पास जमीन है जिस पर ये खेती करते हैं। सवरेज पानीपत कैराना रोड पर किसी गाड़ी पर चालक की नौकरी करता था। उसके दो बच्चों के सिर से पिता का साया उठ गया। प्रधान ने बताया कि पूरा गांव परिवार की मदद करेगा।
उवेश को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं
कैराना। हादसे में मारे गए फरमान का चचेरा भाईउवेश भी गाड़ी में था। उसके परिजन हादसे के बाद मौके पर चले गए थे। देर रात घर पर मौजूद परिजनों को उवेश के बारे में स्पष्ट जानकारी नहीं थे। वे उसे घायल बता रहे थे।