- दस गांवों के ग्रामीणों को नहीं मिल रहा पा रहा विकास योजनाओं का लाभ
संवाद न्यूज एजेंसी
शामली। 12 साल के बाद भी जिले के कई विभाग बागपत व मुजफ्फरनगर जिलों में संचालित हो रहे हैं। जिससे 10 गांव के ग्रामीणों को सरकारी योजनाओं का लाभ नहीं मिल पाता। समस्याओं के समाधान के लिए दूसरे जिलों चक्कर लगाने पड़ते हैं। दूसरे जिलों के विभागाध्यक्ष जिले के समस्याओं के समाधान की रुचि नहीं लेते।
मुजफ्फरनगर जिले से अलग कर शामली को 28 सितंबर 2011 को जिला बनाया गया था। नवसृजित जिले में बुढ़ाना तहसील के दस गांवों को कांधला ब्लाक और शामली तहसील में शामिल किया गया। दस गांवों की स्वास्थ्य सेवा मुजफ्फरनगर जिले से संचालित है। इन गांवों के आयुष्मान कार्ड बनवाने के लिए मुजफ्फरनगर जाना पड़ता है।
औद्योगिक क्षेत्र बढ़ा, जिले में नहीं उद्योग केंद्र कार्यालय, पद सृजित नहीं
शामली। बारह साल के अंतराल में कैराना रोड पर कंडेला में वर्ष 1982 से औद्योगिक केंद्र संचालित है। मौजूदा समय में 150 से ज्यादा औद्योगिक इकाई कार्यरत है। औद्योगिक क्षेत्र का काफी विस्तार हो चुका है। उत्तर प्रदेश शासन से उद्यमी सीमा विस्तार की मांग की जा रही है, लेकिन शासन से सीमा विस्तार की अनुमति नहीं मिली। 12 साल में शामली जिले को जिला उद्योग केंद्र स्वीकृत नहीं हो पाया है।
मुजफ्फरनगर से आकर अधिकारी उद्यमियों के साथ बैठक करते हैं। जिले में यमुना नदी, कृष्णा नदी और पूर्वी यमुना नहर है। लेकिन जिले का ड्रेनेज खंड मुजफ्फरनगर जिला मुख्यालय से संचालित हो रहा है। जिला बनने के बाद मुजफ्फरनगर जिले से पूर्वी यमुना खंड शामली कैराना रोड पर सिंचाई विभाग की भूमि में स्थापित हो चुका है। जिला का ड्रेनेज खंड कार्यालय शामली जिला मुख्यालय पर स्थापित नहीं हो पाया है। पूर्वी यमुना नहर खंड शामली जिले से बागपत जिले तक विभाग संचालित होता था। नहर खंड में शामली जिले से हटाकर बागपत पूर्वी यमुना नहर का नया खंड बनाया गया। जिसमें कांधला जिलेदार कार्यालय को बड़ौत में खोल कर कांधला के नाला समेत कई गांवों को बड़ौत कार्यालय में शामिल कर दिया गया।
कांधला क्षेत्र के बीस गांव रमाला मिल को दे रहे है अपना गन्ना
जिले में गन्ना विभाग का कार्यालय है। इसके बाद भी कांधला एलम क्षेत्र के बीस गांव के किसान बागपत जिले की रमाला चीनी मिल को गन्ना आपूर्ति करते है। गन्ना भुगतान की समस्याओं को लेकर बागपत जाना पड़ता है। शामली जिला बनने के बाद जिले के बीस गांवों को बागपत के रमाला गन्ना परिषद से हटाकर शामली गन्ना परिषद में शामिल करने का शासनादेश जारी किया गया था। लेकिन रमाला गन्ना विकास समिति में जिले के बीस गांवों को शामली गन्ना सहकारी विकास समिति में शामिल नहीं किया गया। बाद में इन गांवों को शामली गन्ना परिषद से फिर रमाला गन्ना परिषद में शामिल कर दिया गया।
सेवायोजन कार्यालय के पद नहीं है सृजित
जिला सेवायोजन कार्यालय के पद सृजित नही हुए। पदों पर तैनाती न होने से मुजफ्फरनगर जिला मुख्यालय से शामली जिले का सेवायोजन कार्यालय संचालित हो रहा है। जिला सेवायोजन अधिकारी अजय कुमार ने बताया कि डीएम ने कार्यालय स्थापना के लिए 500 वर्ग गज भूमि आवंटित की गई है। उन्होंने बताया कि सेवायोजन कार्यालय के लिए लोक निर्माण विभाग को कार्यदाई संस्था बनाया गया है। डीएम जसजीत कौर ने भवन निर्माण के लिए 1.21 करोड़ का एस्टीमेट बनवाकर शासन को भेजा गया है। अस्थाई रूप से किराए के लिए शासन से बजट नहीं मिल पाया है। शासन को नए पद सृजित करके तैनाती के लिए मांग की गई है।
प्रभारी मंत्री दिनेश खटीक के सामने उठ चुका है मुद्दा
जिले में कार्यालय न होने दूसरे जिलों में विभागों का संचालन होने का मुद्दा प्रभारी मंत्री दिनेश खटीक के सामने उठा चुका है। प्रभारी मंत्री ने विभागों को जिले में हस्तांतरित करने का आश्वासन दिया था। लेकिन अभी तक समस्याएं जस की तस है। किसान नेता सुनील पंवार का कहना है कि बार-बार दस गांवों की समस्याएं अधिकारियों के सामने उठ चुकी हैं, लेकिन समाधान नहीं हुआ।
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समस्या के समाधान के लिए शासन को प्रस्ताव भेजा गया था, लेकिन अभी वहां से कोई कार्रवाई नहीं हुई। - जसजीत कौर, डीएम शामली।