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मामौर झील फिर ओवरफ्लो होकर टूटी, गेहूं की 205 बीघा फसल जलमग्न

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कैराना में मामौर झील टूटने से फसलो में भरा गंदा पानी - फोटो : SHAMLI
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मामौर झील फिर ओवरफ्लो होकर टूटी
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शामली, कैराना। मामौर झील एक बार फिर से ओवरफ्लो होकर टूट गई। झील का गंदा पानी 205 बीघा गेहूं की फसलों में भर गया। इससे किसानों का काफी नुकसान हुआ है।
बुधवार सुबह करीब तीन बजे मामौर झील टापू के पास से ओवरफ्लो होकर टूट गई। जिससे झील का गंदा पानी सैकड़ों बीघा गेहूं की फसल में भर गया। झील का गंदा पानी भरने से ऊंचा गांव निवासी किसान राजबीर की 110 बीघा गेहूं की फसल, हरिकिशन की 50 बीघा गेहूं की फसल, हरपाल की 20 बीघा गेहूं की फसल, तेजपाल की पांच बीघा गेहूं की फसल व पंजीठ निवासी महमूद की 20 बीघा गेहूं की फसल बर्बाद हो गई। पीड़ित किसानों ने सुबह झील किनारे मिट्टी की आड़ लगाकर झील का पानी बढ़ने से रोका। पीड़ित किसान हरिकिशन ने बताया कि बार-बार झील टूटने से किसानों को नुकसान होता है। लेकिन मुआवजा नहीं मिलता।
- दो साल में होगा मामौर झील की समस्या का समाधान
कैराना। मामौर झील की समस्या का समाधान दो साल में होगा। जल निगम झील के पास सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट निर्माण का कार्य करा रहा है।
कैराना का सारा गंदा पानी बड़े नाले से मामौर झील में जाता है। इसके अलावा पंजीठ, मवी व मामौर के पानी के अलावा बरसात का पानी भी मामौर झील में समाता है। झील के पानी की निकासी नहीं होने के कारण यह अक्सर ओवरफ्लो होकर टूटती रहती है। करीब चार साल पहले मंडलायुक्त सहारनपुर ने मामौर झील पर पहुंचकर जल निगम को यहां सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट बनाने के निर्देश दिए थे।
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एक सप्ताह पूर्व जल निगम द्वारा 78.60 करोड की लागत से 8400 वर्गमीटर जमीन पर 15 एमएलडी की क्षमता का सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट का निर्माण शुरू करा दिया। सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट को सुभाष इंफ्रा प्रोजेक्ट लिमिटेड कर रही है। बुधवार को कंपनी के इंजीनियर व कर्मचारी प्लांट की नींव व बाउंड्री के लिए सरियों का जाल बनाने में लगे थे। यह प्लांट के 2023 तक बनकर तैयार होने की उम्मीद है। इसके बनने के बाद झील का पानी बड़े पाइपों से प्लांट तक लाया जाएगा। जहां प्रतिदिन डेढ़ करोड़ लीटर गंदे पानी का शोधन करके उसे पाइपों से यमुना नदी में छोड़ा जाएगा। इससे झील कभी भी ओवरफ्लो नहीं होगी।

कैराना में मामौर झील टूटने से फसलों में भरा गंदा पानी- फोटो : SHAMLI

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