मदरसों में रहने वाले छात्रों, शिक्षकों का होगा सत्यापन
शामली। जलालाबाद में म्यांमार के एक रोहिंग्या और नाम बदलकर रह रहे तीन छात्रों के पकड़े जाने के बाद प्रशासन अलर्ट हो गया है। इस प्रकरण के बाद पुलिस प्रशासन ने मदरसों में रहने वाले छात्र और शिक्षकों के सत्यापन की तैयारी कर ली है। पुलिस और अल्पसंख्यक कल्याण विभाग की संयुक्त टीमें इनका सत्यापन करेंगी। एसपी ने इस संबंध में डीएम से अनुरोध किया है।
जलालाबाद में जिस तरह रोहिंग्या समेत चार युवक पकड़े गए, उसने पुलिस के सूचना तंत्र के अलावा खुफिया एजेंसियों पर भी सवाल उठा दिए हैं। इस प्रकरण के बाद पुलिस प्रशासन को मदरसों में रहने वाले छात्र और शिक्षकों के सत्यापन की जरूरत महसूस हो रही है। चूंकि मदरसों का संचालन संबंधी व्यवस्थाएं जिला अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के पास है। लिहाजा पुलिस का प्रयास है कि पुलिस, प्रशासन और अल्पसंख्यक कल्याण विभाग की संयुक्त टीमें इन मदरसों में जाकर वहां छात्र और शिक्षकों का सत्यापन करें। इस संबंध में एसपी अजय कुमार ने डीएम अखिलेश सिंह से भी बात की और पुलिस के प्लान की जानकारी दी। एसपी के अनुसार डीएम से मदरसों में रहने, पढ़ने और पढ़ाने वालों के सत्यापन का अनुरोध किया गया है। जलालाबाद के प्रकरण के बाद सुरक्षा और शांति की दृष्टि से यह सत्यापन बहुत जरूरी हो गया है।
मान्यता प्राप्त नहीं था मदरसा
शामली। जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी प्रसून राय के अनुसार जलालाबाद के जिस मदरसे के छात्र और शिक्षक पकड़े गए हैं। वह मान्यता प्राप्त अनुदानित मदरसा नहीं था। वो दीनी मदरसा था। ऐसे मदरसों का रिकार्ड आदि भी विभाग पर नहीं होता।
इतना आसान नहीं होगा सत्यापन करना
शामली। मदरसों का पुलिस और अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के संयुक्त सत्यापन का प्लान तो है, लेकिन ये काम इतना आसान नहीं है। दरअसल जिले में मान्यता प्राप्त मदरसे केवल 45 हैं, जबकि सरकारी अनुदानित केवल 18 ही हैं। इनमें तो सत्यापन में कोई अड़चन नहीं होगी, लेकिन मस्जिदों या अन्य स्थानों पर चल रहे छोटे बड़े कई मदरसों में जांच पड़ताल करना इतना आसान नहीं होगा। इन मदरसों का कोई भी रिकार्ड अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के पास भी नहीं होता। जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी के अनुसार बिजनौर के एक मामले में भी मदरसों के सत्यापन का वहां मदरसा बोर्ड ने विरोध किया था।
कुल मान्यता प्राप्त मदरसे 47
सरकारी अनुदानित मदरसे 18
मानदेय पाने वाले शिक्षक 45
पोस्ट ग्रेजुएट शिक्षक 7
ग्रेजुएट 38
अनुदानित मदरसों को ये मिलती है सरकारी सहायता
जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी के अनुसार सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त मदरसों को अनुदान के रुप में वहां पढ़ाने वाले शिक्षकों को मानदेय दिया जाता है। स्नातक योग्यता वाले शिक्षक को राज्यांश के रूप में दो हजार और केंद्रांश के रुप में छह हजार रुपये प्रतिमाह कुल आठ हजार रुपये प्रतिमाह दिए जाते हैं। जबकि पोस्ट ग्रेजुएट शिक्षक को केंद्राश के रूप में 12 हजार और राज्यांश के तीन हजार रुपये कुल 15 हजार रुपये महीना मिलते हैं। बजट के अभाव में तीन साल से केंद्रांश नहीं मिला है, हालांकि राज्यांश दिया जा रहा है।
कोट
मदरसों में रहने वाले छात्र, शिक्षकों का पुलिस और अल्पसंख्यक कल्याण विभाग द्वारा संयुक्त रूप से सत्यापन कराया जाएगा। जलालाबाद प्रकरण के बाद शांति और सुरक्षा की दृष्टि से ये जरूरी हो गया है। डीएम से अनुरोध किया गया है। - अजय कुमार पांडेय, एसपी शामली
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एसपी ने जलालाबाद प्रकरण में बात की है। उन्होंने मदरसों के सत्यापन कराने का अनुरोध किया है। इस संबंध में जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी से कहा गया है कि वह एसपी शामली से संपर्क कर लें। पुलिस को पूरा विभागीय सहयोग दिया जाए। टीम गठित कर सत्यापन कराया जाएगा। - अखिलेश सिंह, डीएम शामली