पुलवामा में आतंकियों के आत्मघाती हमले में शहीद सीआरपीएफ के जवान प्रदीप के गांव की गलियों में सरहद की तनातनी की ही चर्चा थी। गलियों के चबूतरों पर चारपाईयों पर लोगों की चौकड़ियां थी। जुबां पर बस यही बात थी कि इस बार तो आरपार की हो जाने दो। सेना की कार्रवाई से युवा और बुजुर्ग सब उत्साहित थे। कुछ ने तो यहां तक कह दिया कि म्हारे बम बांध दो ,आधे पाकिस्तान तो उड़ा ही देंगे।
अमर उजाला टीम दोपहर करीब दो बजे जब गांव की गलियों से गुजरी तो कई गलियों में लोगों की चौपाल सी लगी थी। चबूतरों पर चारपाईयां डली थी। युवा से लेकर बुजुर्ग सब बैठे आपस में बतिया रहे थे। हर कोई भारतीय सेना के जवाबी हमले की चर्चा कर रहा था। एक गली में बैठे ग्रामीणों से अमर उजाला टीम ने बात की और उनके मन की बात जानी। कई का कहना था कि बहुत हो गया। इस आतंकवाद और उसके आकाओं सबका खात्मा होना चाहिए। बुजुर्ग और युवाओं ने यहां तक कहा कि वे मानव बम बनकर अपने देश की सीमा पर जाकर अपनी शहादत देने तक को तैयार हैं। एक युवक ने तो यहां तक कहा कि इस पाकिस्तान कू तो जड़ से खत्म कर देेना चाहिए। मेरे तो 10-20 बम ऐसे बांध दो, जिसे बांधकर मैं पाकिस्तान चला जाऊं । कम से कम आधा पाकिस्तान तो खत्म हो जागा। मुझे इस बात का कतई गम ना कि मेरी जान चली जाएगी।
असलहे आरडीएक्स दे दो, पाकिस्तान में कूद जाऊंगा
गांव का सुधीर कुमार सेना की जवाबी कार्रवाई से बेहद उत्साहित था। बताया कि मेेेरा तो यो मन कर रहा है कि सरकार हमें भी वहां भेज दे। हमें थोड़ा सा असलहा दे दे। आरडीएक्स दे दे। हम तो उसे लेकर पाकिस्तान में भी कूदने को तैयार हैं।
वैसे भी मरने की उम्र आ गई है...
70 साल के बुजुर्ग धर्मवीर सिंह कहते हैं कि पाकिस्तान 70 साल से बदमाशी कर रहा है। ये बातों से नहीं मानने वाला। अब इसे तो ठीक करणा पडे़गा। मुझे बांध तो बम और मैं कूद जाऊंगा वहां। अब तो वैैसे भी मरने की उम्र आ गई है। कम से कम देश के लिए तो कुछ करूंगा।
पहले अपणे वालों को ठीक करेंगे-
गांव के दुष्यंत कहते हैं कि मुझे और मेरे दोस्त प्रवीण को कश्मीर में भेज दो। हम पहले तो अपणे वालों को ठीक करेंगे। म्हारे देश में भी कम आतंकवादी णा हैं। अपणों के बाद फेर हम पाकिस्तान वालों कू देखेंगे। देखेंगे उसमें कितणा दम है।
बुजुर्ग और जवान, सब सीमा पर जाने को तैयार
विजय कुमार कहते हैं कि गांव का एक एक बच्चा, एक एक जवान और बुजुर्ग सब सीमा पर जाने को तैयार हैं। बहुत झेल लिया। कई जवान शहीद हो गए इस आतंकवाद से। अब आतंकवाद की ये समस्या खत्म होनी चाहिए और उसे पनाह देने वालों का भी नामोनिशान मिटना चाहिए।
गाजियाबाद की संस्था ने शहीद की पत्नी को दी मदद
गाजियाबाद की वृंदा वूमन क्लब की सदस्या बुधवार को शहीद प्रदीप के घर पहुंची और परिजनों को 50 हजार की आर्थिक मदद का चेक दिया। सदस्यों ने बताया कि शहीद प्रदीप की शहादत पर देश को नाज है। उन्होंने शहीद की पत्नी को चेक सौंपा। इनमें रितू शर्मा, ममता अग्रवाल, कविता डागर, नीरु तिवारी, शुभम ,संगीता तनेजा, रंजना अग्रवाल आदि रहे।