शामली। बागपत में बिजली का करंट लगने से दो कर्मचारियों की मौत और शामली के बरला जट में बिजली लाइन ठीक करते समय दो विद्युत कर्मचारी करंट लगने से झुलस गए थे। मगर हादसों के बाद भी विभागीय अधिकारी सबक लेने को मजबूर नहीं है। जिलेभर में बिना सुरक्षा उपकरण ही कर्मचारी खंभोंं, ट्रांसफार्मरों में आए फाॅल्ट को दूर कर रहे हैं, जिससे कभी भी हादसों का शिकार हो सकते हैं। पड़ताल के दौरान टीम को कुछ इस तरह का नजारा देखने को मिला....
करमूखेड़ी गांव, समय-सुबह 11 बजे
करमूखेड़ी गांव में कर्मचारी बिना सुरक्षा हेलमेट और ग्लब्स पहनकर ही बिजली के तारों को जोड़ रहा था। उपकरणों के बारे में पूछने पर कहा कि उसे उपकरण नहीं दिए गए हैं, जिसके कारण उपकरणों का प्रयोग नहीं किया है।
मुंडेट कलां गांव, समय- दोपहर 11.30 बजे
यहां पर भी दो कर्मचारी अलग अलग बिजली के खंभों पर चढ़कर लाइन में आए फाल्ट को दूर कर रहे थे। दोनों ने सुरक्षा हेल्मेट से लेकर बेल्ट तक आदि नहीं लगाई थी। पूछने पर कहा कि बेल्ट लगानी भूल गया था।
ऊन , समय- सुबह 10 बजे
यहां पर एक कर्मचारी बिजली लाइन में आए फाल्ट को दूर कर रहा था। हालांकि, कर्मचारी ने हेलमेट से लेकर अन्य उपकरण पहने हुए थे। ग्रामीण मुनीर, बबली और संजीव ने कहा कि कई बार कर्मचारी बिना सुरक्षा उपकरण ही लाइन को ठीक करने के लिए चढ़ जाते हैं, जिससे हादसों का खतरा रहता है।
झिंझाना, समय- स़ुबह 11 बजे
यहां पर भी एक कर्मचारी बिना हेलमेट, बेल्ट आदि का प्रयोग किए लाइन में आए फाल्ट को बिजली के खंभे पर चढ़कर दूर करने का प्रयास कर रहा था। पूछने पर कहा कि उपकरण पहनने भूल गया था।
ये उदाहरण तो बानगी भर मात्र है। आए दिन कर्मचारी जान जोखिम में डालकर इसी तरह बिजली ठीक करते दिखाई देते हैं मगर विभागीय अधिकारी उनकी सुरक्षा को कतई गंभीर नहीं है।
शट डाउन के बावजूद चालू कर दी जाती है बिजली, होते हैं हादसे
कुछ कर्मचारियों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि कई बार ऐसा होता है कि बिजली आपूर्ति को सुचारु कराने के लिए वह शट डाउन लेते हैं, मगर बिजली घर से आपूर्ति को शटडाउन के समय ही चालू कर दिया जाता है, जिसके कारण कर्मचारी हादसों का शिकार होते हैं। हर साल सात से आठ कर्मचारी जिले में हादसों का शिकार होते हैं।
हाल ही में करंट लगने से ये झुलसे थे
बिना शट डाउन लिए टूटे बिजली के तार को बरला जट गांव में ठीक कर रहे दो कर्मचारी राजेंद्र और सोनू करंट लगने के कारण तीन दिन पूर्व झुलस गए थे। अब दोनों की हालत में सुधार है। कर्मचारियों ने उचित सुरक्षा के इंतजाम की मांग विभागीय अधिकारियों से की है ताकि हादसों को होने से बचाया जा सके।
खुद लापरवाही करते हैं कर्मचारी
विद्युत संविदा संघ उत्तर प्रदेश के जिलाध्यक्ष रविंद्र कुमार और महामंत्री रविपाल ने बताया कि अधिकतर कर्मचारी खुद ही लापरवाही करते हैं। सभी कर्मचारियों को ऊर्जा निगम की तरफ से सुरक्षा हेलमेट, गलब्स, बेल्ट आदि दी गई है मगर कई बार कर्मचारी उपकरणों का प्रयोग नहीं करते, जिसके कारण हादसों का शिकार हो जाते हैं। यदि अधिकारी उपकरण नहीं दे रहे हैं तो काम करने से साफ इनकार कर देे। जब तक शटडाउन लिखित में नहीं मिले, बिजली का काम नहीं करें।
जिलेभर में 1120 के करीब लाइनमैन है। सभी को बिजली के आए फाल्ट को दूर करने के लिए उपकरण दिए गए हैं। यदि किसी के पास नहीं है तो तुरंत उपलब्ध कराया जाएगा। साथ ही चेकिंग कराई जाएगी कि कोई कर्मचारी बिना उपकरणों के लाइन को तो ठीक नहीं कर रहा। यदि कोई कर्मचारी ऐसा करता मिलता है तो उसके खिलाफ कार्रवाई कराई जाएगी।
नरेश कुमार, अधीक्षण अभियंता, शामली