कैराना। प्राथमिक विद्यालयों की बदहाली से कैराना क्षेत्र भी अछूता नहीं है। कहीं पर 100 बच्चों को पढ़ाने की जिम्मेदारी एक अध्यापक पर है, तो कहीं स्कूल में छात्राओं के लिए शौचालय तक नहीं है। टाट पट्टी छोड़ो, सर्दी के दिनों में विद्यालय प्रांगण में बच्चों को ईंट पर बैठने को मजबूर होना पड़ रहा है। स्कूल के गेट पर कीचड़ भरी रहती है। यूनिफार्म और किताबों का वितरण भी सभी बच्चों को नहीं हो सका है। बृहस्पतिवार को अमर उजाला टीम ने कैराना क्षेत्र के स्कूलों में देखा, तो वहां की बदहाली बयां कर रही थी कि बच्चों का शैक्षिक स्तर इन हालातों में कैसे ठीक होगा।
प्राथमिक विद्यालय झाड़खेड़ी
विद्यालय में 92 बच्चों का दाखिला है, जिनमें से बृहस्पतिवार को 45 उपस्थिति थे। बच्चों को पढ़ाने के लिए तीन सहायक अध्यापिकाएं और एक प्रधानाध्यापक की तैनाती है। कुछ बच्चे यूनिफार्म में पहुंचे, तो कुछ बगैर यूनिफार्म। कक्षा में बच्चे टाट पर बैठकर पढ़ाई करते मिले, जबकि कक्षा एक और दो के बच्चे बाहर मैदान में ईंटों पर बैठकर पढ़ाई कर रहे थे। प्रधानाध्यापक शहनवाज खान ने बताया कि प्रशासन से जितनी यूनिफार्म और किताबें मिली, उनका वितरण कराया जा चुका है।
प्राथमिक विद्यालय इस्लामनगर देहात
इस्लाम नगर देहात के प्राथमिक स्कूल के बाहर नाली की कीचड़ स्कूल के गेट तक फैली थी। बच्चों को उसी कीचड़ से गुजरकर स्कूल पहुंचना पड़ता है। बच्चों को टाट पट्टी पर बैठकर ही पढ़ाई करनी पड़ती है। मध्याह्न भोजन के बारे में बच्चों ने बताया कि मिल रहा है। स्कूल प्रधानाध्यापक सोमपाल सिंह ने बताया कि कक्षा एक से कक्षा पांच तक स्कूल में 133 बच्चे हैं ।
प्राथमिक विद्यालय आर्यपुरी देहात
विद्यालय के प्रधानाध्यापक अखलाख ने बताया कि विद्यालय में 382 बच्चे हैं। जिनमें से आज 303 बच्चे उपस्थित हुए हैं। बच्चों को पढ़ाने के लिए स्कूल में चार सहायक अध्यापक और एक शिक्षा मित्र की तैनाती है। स्कूल में रूम की कमी होने के कारण बच्चों को सर्दी के मौसम में भी बाहर खुले में पढ़ाना पड़ता है। यहां भी बच्चे टाट पर बैठेे नजर आए। उधर डीएम सुजीत कुमार, ने कहा कि स्कूलों में शैक्षिक स्तर सुधार के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। बच्चों को पढ़ाने और अनुशासित बनाने में जो अध्यापक लापरवाही बरतेंगे, जांच कराकर उनके खिलाफ कार्रवाई कराई जाएगी।
स्कूल में शौचालय तक नहीं
आर्यपुरी देहात स्थित पूर्व माध्यमिक विद्यालय में कोई शौचालय नहीं है। छात्राओं को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है और मजबूरी में छात्राएं पड़ोस के मकान में लघुशंका और शौच के लिए जाती हैं। विद्यालय के प्रधानाध्यापक नत्थू सिंह ने बताया कि स्कूल की स्थापना 2005 में हुई थी। तब से स्कूल में कोई भी शौचालय नहीं बन सका। कई बार अधिकारियों से शिकायत भी कर चुके हैं। उन्होंने बताया कि ग्राम पंचायत निधि से स्कूल में शौचालय का निर्माण शुरू हुआ था, लेकिन ग्राम सभा के खाते में रुपये नहीं होने के कारण दो माह से शौचालय निर्माण का कार्य अधर में लटका हुआ है।