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Shamli News: 16 सदस्यीय टीम को तेेंदुआ पकड़ने में लग गए पांच घंटे

Sun, 28 Jan 2024 02:55 AM IST
मेरठ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, शामली
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वन्य जीव विशेषज्ञ डॉ. आरके सिंह
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शामली/कांधला। पिछले करीब चार माह से जिलेभर में तेंदुए का शोर मचा हुआ था। दहशतजदा ग्रामीणों ने टोलियों में जाना शुरू कर दिया था। जिस भी गांव में तेंदुआ दिखाई देता था, वन विभाग के अधिकारी तेंदुआ नहीं होने का दावा करते थे। कांधला के सुन्ना गांव में मिले तेंदुआ ने वन विभाग के दावों की पोल खोल दी है। किसान द्वारा लगाए गए जाल में फंसने के बाद भी वन विभाग को तेंदुए को पकड़ने में 5 घंटे से अधिक का समय लग गया। ग्रामीणों का कहना है कि जिले में अभी भी कई तेंदुए है, जिन्हें समय से पकड़ना जरूरी है।
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शायद ही कोई दिन बीत रहा था जो जिले के किसी न किसी गांव में तेंदुए के दिखने की सूचना ग्रामीण वन विभाग के अधिकारियों को न दे रहे हो। सूचना पाते ही वन विभाग के अधिकारी भी मौके पर पहुंंचते मगर हर बार वन विभाग के अधिकारी ग्रामीणों के दावे को झूठा ठहरा देते थे। जंगली सुअर या फिर बिल्ली होने की बात विभागीय अधिकारी कहते रहे। सुन्ना गांव के ग्रामीण रामबीर, संदीप ने बताया कि तेंदुआ सबसे पहले ग्रामीण द्वारा जंगली जानवरों से बचाव को लगाए गए जांच में शुक्रवार रात 11 बजे फंस गया था। स्थानीय वन विभाग की टीम तेंदुए को पकड़ने में नाकाम रही। इसके बाद मेरठ वन विभाग की दो सदस्यीय टीम मौके पर पहुंची और शनिवार सुबह चार बजे तक तेंदुए को पक़ड़ा जा सका। 16 सदस्यीय टीम को जांच में फंसे तेंदुए को पकड़ने में भी पांच घंटे से अधिक का समय लग गया।
तेंदुआ किसान के खेत में लगाए गए ट्रैप में फंस गया था। जिसके बाद वन विभाग की टीम ने उसको रेस्क्यू किया। पूर्व में कई बार ग्रामीणों ने तेंदुआ दिखने की सूचना तो दी थी मगर कहीं पर भी तेंंदुए के पैरों के निशान नहीं मिले थे। जिले में अन्य भी तेंदुए हैं या नहीं, इस बारे में कुछ नहीं कहा जा सकता। फिर भी तलाशी अभियान जारी है। लोगों को भी सचेत किया जा रहा है।
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जगदेव सिंह, डीएफओ, वन विभाग
तेंदुए जल्दी से नहीं करता मनुष्य पर हमला, 14 साल होता है जीवनकाल
वन्य जीव विशेषज्ञ डॉ. आरके सिंह के अनुसार वह अभी तक तेंदुए समेत 200 से अधिक वन्य प्राणियों को रेस्क्यू करवा चुके हैं। तेंदुए का जीवनकाल करीब 14 साल का होता है। तेंदुआ माहिर और चालाक शिकारी की तरह होता है। यह अपने वजन से अधिक के वन्य प्राणी या फिर अन्य किसी को शिकार के लिए पेड़ पर जाकर भी छिपा सकता है। जबकि टाइगर और शेर ऐसा नहीं कर पाते। यह जानवर मनुष्य से दूर रहता है। मनुष्य पर आत्मरक्षा में ही हमला करता है। जल्दी से यह मनुष्य पर हमला नहीं करता है।
तेंदुए की वीडियो भी बनाकर अधिकारियों को भेज रहे थे ग्रामीण, फिर भी गंभीरता नहीं दिखाई
जिले में सबसे पहले पांच सितंबर को लतीफगढ़ गोशाला के पास ग्रामीणों ने तेंदुआ देखने को दावा किया था। 14 सितंबर को हिंड और 21 को यारपुर के जंगल में तेंदुआ देखा गया। इसके अलावा क्षेत्र के भैंसवाल, मालैंडी, कांधला के जसाला, भारसी में भी तेंदुओं को देखने का दावा ग्रामीण कर चुके हैं। ग्रामीणों ने सात वीडियो अलग अलग तेंदुओं की वन विभाग के अधिकारियों को भेजी थी मगर हर बार विभागीय अधिकारियों ने जांच के बाद तेंदुआ नहीं होने का दावा किया।
विभाग के पास संसाधनों का अभाव, पड़ोसी जिलों से मंगवाए जाते हैं पिंजरे
विभाग के पास संसाधनों का भी अभाव है। बागपत, मुजफ्फरनगर से उधार का पिंजरा मंगवाकर चौसाना, थानाभवन, कांधला क्षेत्र में लगाया, गया था मगर सफलता हाथ नहीं लग सकी।

तेंदुए के हमले से बचने से लिए करें यह उपाय
- खेतों में दो या उससे अधिक के समूह में जाएं

- गन्ना काटने से पहले जंगल में जाकर हाका लगाए

-खेत में काम करते समय मोबाइल या रेडियो पर गाने चलाएं

- काम करते समय एक व्यक्ति को निगरानी के लिए लगाएं

- खेतों में काम करते समय सिर पर हेलमेट या नकपैड पहनें

- अधिक रात में खेतों पर न जाएं, खेतों की निगरानी मचान से ही करें

- वन्य जीव दिखने पर वन अधिकारियों को तुरंत सूचना दें



पकड़ा गया तेंदुआ मादा, पांच किलो मांस खाया, पूरी तरह से सुरक्षित

कांधाल के सुन्ना गांव से पकड़ा गया तेंदुआ मादा है, जिसकी उम्र करीब दो साल है। वन विभाग के क्षेत्रीय अधिकारी राजेश कुमार ने बताया कि रेस्क्यू किए गए तेंदुए का मेडिकल परीक्षण कराया गया। जांच में पूरी तरह से स्वस्थ मिला है। उसे पांच किलो मांस खिलाया गया।

मनुष्य के पिंजरे की तरफ जाने पर दहाड़ता रहा तेंदुआ
कांधला से तेंदुए को शामली में वन विभाग के कार्यालय में लाया गया। जहां पर उसे देखने के लिए लोगों की भीड़ लगी रही। जो भी लोग पिंजरे की तरफ को जा रहा था, तेंदुआ उसकी तरफ को दहाड़ रहा था।

ग्रामीण बोले, अभी कई अन्य भी तेंदुए जिले में
भैंसवाल गांव के वीरेंद्र, सुधीर पंवार, कांधला के रमेश, मुनेश का कहना है कि जिले में अभी ओर भी तेंदुए हो सकते हैं। दहशत के कारण ग्रामीण अभी भी खेतीबाड़ी करने के लिए टोली में ही लाठी-डंडों से लैस होकर जा रहे है। वन विभाग के अधिकारियों को जल्द से जल्द अन्य तेंदुओं को पकड़ने का भी प्रयास करना चाहिए।
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