शामली। डीएम ने महिला ग्राम प्रधानों से कहा कि वह अपने संवैधानिक अधिकारों को पहचानें और उनका उपयोग करें। अगर वह जागरूक नहीं होंगी, तो आने वाली पीढ़ी की बहू बेटियां भी सबल नहीं हो पाएंगी। सोमवार को कलक्ट्रेट सभाकक्ष में महिला समाख्या की ओर से ‘एक अरब बढ़ते कदम’ कार्यक्रम के तहत महिला ग्राम प्रधानों का सम्मेलन किया गया।
शुभारंभ जिलाधिकारी इंद्र विक्रम सिंह दीप प्रज्ज्वलित करके किया। इस दौरान जिलाधिकारी ने कहा कि आज भी समाज में काफी विसंगतियां हैं, अभी भी महिला और पुरुष कई मामलों पर एक दूसरे से बात करने में हिचकते हैं, यह भी एक लिंगभेद है। इतनी बड़ी संख्या में महिला प्रधान चुने जाने के बावजूद महिलाएं अपनी जिम्मेदारी नहीं निभा पाती हैं, बल्कि परिवार के पुरुष को आगे रखती हैं। महिला प्रधानों को अपने संवैधानिक अधिकार दूसरों को नहीं सौंपने चाहिए। शौचालय की जरूरत पुरुषों की अपेक्षा महिलाओं को ज्यादा होती है, लेकिन महिलाएं इसकी आवाज नहीं उठाती। जनपद में समाख्या की स्थापना अभी हुई है जो जागरूकता के कार्य कर रही है। यह केवल जागरूक कर सकती है, लेकिन निर्णय आपको ही लेना पड़ेगा।
महिला समाख्या की जिला समन्वयक तरन्नुम ने कहा कि संगठन 27 वर्षों से कार्यरत है, जो लिंग भेद मिटाने, महिलाओं में जागरूकता, उनके अधिकारों के लिए विभिन्न कार्यक्रम चला रहा है। तमाम प्रयासों के बावजूद महिलाओं से छेड़छाड़, बलात्कार, यौन उत्पीड़न, हिंसा के मामले सामने आते हैं।
संगठन की पूजा ने कहा कि ग्राम स्तर पर महिलाओं के समूह और 14-15 गांवों कर क्लस्टर बनाकर कार्य किया जाता है। अगर आपकी मुट्ठी में ताकत है तो कोई आपका उत्पीड़न नहीं कर सकता। इस मौके पर मुख्य रूप से जिला पंचायत राज अधिकारी नरेशचंद, डिप्टी सीएमओ आरके गोयल, समाख्या की शमशाद, रेखा, स्नेहलता, सीमा, मधु, नसीमा कैराना, पूजा, यशपाल, अश्वनी, ग्राम लिसाढ़ प्रधान संयोगिता मलिक, शारदा देवी कांधला, रेखा, नसरीन, शबाना, राजेश, संजीव मलिक, डॉ. योगेंद्र सिंह आदि मौजूद रहे।