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राखी भेज रही हूं मैं तुम सरहद पे डटे रहना

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शामली। व्हाट्सएप के माटी की सुगंध समूह के माध्यम से ऑनलाइन अखिल भारतीय कवि सम्मेलन का बुधवार को आयोजन किया गा। जिसमें राष्ट्रीय गीतकार डॉ. जयसिंह आर्य ने अपनी कविताओं को यूं पढ़ा हिम्मत के संग चलना, जीना जीवन को, डरने से नहीं डरना है।
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मृदुभाषी कवयित्री मोनिका शर्मा गुरुग्राम ने बहुत सरस सरस्वती वंदना से सम्मेलन का आगाज किया। सम्मेलन में पानीपत के कवि अनुपिंद्र सिंह अनूप ने कहा रिश्तों की पावनता को वो क्या समझे, जिनकी खातिर केवल पैसा रिश्ता है। केसर कमल ने रक्षाबंधन की रमन्नक बनाए रखी... राखी भेज रही हूं मैं तुम सरहद पे डटे रहना। मातृभूमि की रक्षा का प्रण तुमको पूरा करना, जयप्रकाश मिश्र ने कहा कि अच्छे और बुरे में अंतर, जितना संध्या और विहान। नफरत से गुमनामी लेकिन, प्रेम दिला जाता पहचान आदि प्रेम गीत सुनाए। भारत भूषण ने भी राखी पर्व को रेखांकित करते हुए कहा बहन भाई के प्यार का रिश्ता है अनमोल। भूषण इसके मोल को, कौन सका है तोल। मेरठ के कवि डॉ. विजय प्रेमी ने बहन-भाई के रिश्ते को वेदों का वरदान की संज्ञा दी। कहा कि यज्ञ सरीखा अनुष्ठान है, वेदों का वरदान है, भाई-बहन का नाता पावन जीवन का विज्ञान है। गुरुग्राम की प्रसिद्ध कवि निवेदिता चक्रवर्ती ने बहुत ही मार्मिक काव्यपाठ किया। प्रीतम सिंह प्रीतम शामली, नरेश लाभ पानीपत, तेजवीर सिंह त्यागी अलीगढ़, गाफिल स्वामी हाथरस, प्रेमसागर प्रेम नोएडा, रामनिवास भारद्वाज जख्मी, हरेंद्र प्रसाद यादव, सरिता गुप्ता व तरुणा पुंडीर तरुनिल दिल्ली, डॉ. पंकज वासिनी पटना बिहार और राजकुमार अरोरा गाइड बहादुरगढ़ ने भी अपनी कविताओं से खूब दाद बटोरी। विशिष्ट अतिथि केसर कमल पानीपत व जयप्रकाश मिश्र गाजियाबाद और संयोजक भारत भूषण करनाल रहे। डॉ. विजय प्रेमी मेरठ ने कवि सम्मेलन का संचालन किया।
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