शामली। प्रदेश सरकार ने माध्यमिक विद्यालयों में 15 जुलाई से ऑनलाइन क्लास शुरू करने के निर्देश दिए हैं। जनपद में 105 माध्यमिक विद्यालय है। विभागीय अधिकारियों का दावा है कि सभी विद्यालयों में ऑनलाइन पढ़ाई शुरू करा दी गई है, लेकिन इन विद्यालयों में पढ़ने वाले ज्यादातर विद्यार्थी मध्यम और गरीब परिवारों से हैं। इनमें अधिकतर के पास स्मार्ट फोन नहीं है। मोबाइल न होने और ग्रामीण क्षेत्रों में नेटवर्क की समस्या ऑनलाइन पढ़ाई में बाधा बन रही है। अमर उजाला टीम ने माध्यमिक विद्यालयों में पहुंचकर ऑनलाइन पढ़ाई की पड़ताल की। पेश है रिपोर्ट...
कक्षा नौ में पढ़ रहे दो बेटे, मोबाइल एक भी नहीं
आरके इंटर कालेज शामली में अपने बेटे के साथ आई मोहल्ला पंसारियान निवासी रजिया ने बताया कि उसके दो बेटे समीर और आस मोहम्मद कक्षा नौ में पढ़ते हैं। उनके पति मजदूरी करते हैं। घर में स्मार्ट मोबाइल नहीं है। मोबाइल लेने के लिए पैसे भी नहीं है। कालेज वाले कहते है कि ऑनलाइन पढ़ाई करो। रजिया का कहना है कि बिना मोबाइल के ऑनलाइन पढ़ाई कैसे होगी, यह समझ नहीं आता। उन्हें तो कालेज खुलने का इंतजार कर रही है। इसी कालेज में गांव टिटौली निवासी कक्षा-11 के छात्र सावेज मिर्जा ने बताया कि उसके पिता टैंपो चलाते हैं। उनके पास स्मार्ट मोबाइल नहीं है। घर पर बस छोटा फोन है। मोबाइल फोन न होने के कारण ऑनलाइन पढ़ाई शुरू नहीं हुई है। गांव लिलौन निवासी वाजिद अली ने बताया कि उनके पिता खेती करते है, चार बीघा जमीन है। उसका बड़ा भाई बीए में पढ़ता है, उसके पास स्मार्ट मोबाइल है। मगर उसके पास मोबाइल नहीं है। वीवी इंटर कालेज में 10वीं के छात्र गांव धनैना निवासी सोनू ने बताया कि घर की हालत ऐसी नहीं कि स्मार्ट मोबाइल ले सके। दो-तीन बीघा जमीन है। मजदूरी कर जैसे तैसे परिवार का गुजारा चलता है। इसी कालेज के कक्षा 11 के छात्र गांव मादलपुर निवासी मनीष कुमार ने बताया कि पिता मजदूरी करते है। उनके पास स्मार्ट मोबाइल नहीं है, जिस कारण उनकी पढ़ाई नहीं हो पा रही है।
व्हाट्सएप ग्रुप पर लिंक और ऑडियो भेज रहे शिक्षक
आरके इंटर कालेज शामली के भौतिकी के शिक्षक रजनीश कुमार ने बताया कि वह विद्यार्थियों को ऑडियो और यू ट्यूब से टॉपिक का लिंक व्हाट्सएप ग्रुप पर भेज रहे हैं। वीडियो बहुत छोटी कभी-कभी भेजते है। बड़ी वीडियो डाउनलोड और अपलोड नहीं हो पाती। इसी कालेज के केमिस्ट्री के शिक्षक मनीष कुमार ने बताया कि मोबाइल पर विद्यार्थियों का व्हाट्सएप ग्रुप बनाया है। उसी पर टॉपिक के नोट्स व ऑडियो भेजते हैं। मोबाइल से कॉल कर विद्यार्थियों का डाउट दूर किया जाता है। प्रधानाचार्य कैप्टन लोकेंद्र सिंह ने बताया कि कालेज में करीब 70 प्रतिशत विद्यार्थी ऑनलाइन कक्षा से जुड़े हुए है। सभी कक्षाओं के व्हाट्सएप ग्रुप बनाए गए हैं। ग्रुप में शिक्षण संबंधी सामग्री भेजी भेजकर ऑनलाइन पढ़ाया जा रहा है। वीवी इंटर कालेज के इतिहास के शिक्षक डॉ. अनुराग शर्मा ने बताया कि 12वीं की कक्षा में 64 में 48 बच्चे अभी मोबाइल पर व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़े हैं, लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों में नेटवर्क की समस्या सामने आ रही है। बहुत छोटी वीडियो ग्रुप में डाली जाती है। बाकी ऑडियो, स्क्रीन शॉट और नोट्स तैयार कर विद्यार्थियों को भेजकर पढ़ा रहे हैं।
कोट
शासन के निर्देश पर 15 जुुुलाई से सभी माध्यमिक विद्यालयों में ऑनलाइन पढ़ाई के लिए सभी प्रधानाचार्यों को निर्देशित किया गया है। सभी विद्यालयों में ऑनलाइन शिक्षण कार्य शुरू कर दिया गया है। जहां पर नेटवर्क या अन्य कोई समस्या है, उसकी जानकारी कर समाधान किया जाएगा। - सरदार सिंह, जिला विद्यालय निरीक्षक।
ऑनलाइन क्लास से आंखों पर पड़ पर प्रभाव
ऑनलाइन क्लास जब से शुरू हुई है तब से विद्यार्थियों की आंखों से पानी आना, लालीपन, सिर और आंख में दर्द होना आदि केस बढ़े हैं। पहले दिन में एक या दो केस आता था, लेकिन अब 10 से ज्यादा केस आ रहे हैं। इनमें ज्यादातर सात से दस साल की उम्र के बच्चे हैं। उन्होंने बताया कि मोबाइल पर लगातार लंबे समय तक बने रहना इसकी वजह है। एक समय में अधिकतम 30 मिनट तक मोबाइल देखा जा सकता है। इससे अधिक समय तक देखना आंखों को नुकसान दे सकता है। आंखों की सुरक्षा के लिए जरूरी है कि आधा घंटे के बाद आंखों को मोबाइल से हटाकर आराम देना चाहिए। - डा. उमंग अग्रवाल, नेत्र रोग विशेषज्ञ।