शामली। भाजपा ने मुजफ्फरनगर दंगे के आरोपी और फायर ब्रांड नेता सुरेश राणा को महंत के मंत्रिमंडल में शामिल कर हिंदुत्व के एजेंडे को धार देने की कोशिश की है। केंद्र सरकार अभी से वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव की तैयारी के लिए रणनीति बनाने के लिए ताना-बाना बुनने लगी है। थानाभवन विधायक सुरेश राणा के मंत्री बनने के निहितार्थ राजनीतिक गलियारों में यही मायने निकाले जा रहे हैं।
दरअसल, वर्ष 2013 में मुजफ्फरनगर जिले के कवाल में दोहरे हत्याकांड के बाद बवाल होने के बाद पंचायतों का दौर चला था। नंगला मंदौड गांव में महापंचायत के दौरान भाकियू नेताओं के अलावा भाजपा नेता भी पहुंचे थे। वहां भड़काऊ भाषण के बाद ही मुजफ्फरनगर के ग्रामीण अंचल से फैला सांप्रदायिक उन्माद शामली के गांवों तक पहुंच गया था। महापंचायत में थानाभवन से भाजपा विधायक सुरेश राणा भी पहुंचे थे। यही वजह है कि सुरेश राणा को भी दंगों का आरोपी बनाया गया था। इसके बाद उन्हें रासुका में निरुद्ध किया गया था।
सूबे की पिछली सपा सरकार ने उन्हें गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। इससे पूर्व, सुरेश राणा हिंदुत्व के मुद्दे गरमाते रहे थे। उनकी छवि कट्टर हिंदूवादी नेता के रूप में हो गई थी। भाजपा ने उनकी छवि को हाथों हाथ लिया। भाजपा ने वेस्ट यूपी के विभिन्न जिलों में प्रचार के लिए भेजा जाने लगा था।
मौजूदा विधानसभा चुनाव के दौरान भी सुरेश राणा को वेस्ट यूपी के साथ ही पूर्वांचल के कई जिलों में प्रचार के लिए भेजा। इन सब बातों पर गौर करें तो भाजपा ने विधायक सुरेश राणा को हिंदुत्व का बड़ा चेहरा मानते हुए राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) से नवाज कर वेस्ट यूपी के लिए संदेश दिया है।