शामली में वीवी पीजी कॉलेज में आयोजित शिक्षक गोष्ठी में हिंदी के विकास एवं प्रचार-प्रसार पर चर्चा की गई। वक्ताओं ने हिंदी की महत्ता बताते हुए इसके उत्थान के लिए सामूहिक प्रयास पर बल दिया। युवा पीढ़ी को भारतीय संस्कृति से जोड़े रखने के लिए हिंदी को अनिवार्य बताया गया।
मंगलवार को आयोजित गोष्ठी में प्राचार्या डा. वंदना ने कहा कि हिंदी हमारी मातृभाषा है और सर्वोपरि है। हमारे ग्रंथ भी हिंदी में ही लिखे हैं। इस ज्ञान के भंडार को जानने के लिए हमें हिंदी की ओर लौटना होगा। देश के उत्थान के लिए मातृभाषा हिंदी का प्रयोग एवं प्रचार-प्रसार अत्यंत आवश्यक है, ताकि आने वाली पीढ़ी अपनी भारतीय परंपराओं से हिंदी में ही जान सकें।
अर्थशास्त्र के असिस्टेंट प्रोफेसर डा. भूपेंद्र कुमार ने कहा कि हिंदी केवल भाषा नहीं, बल्कि हमारी आत्मा है। जब हम अपने विचारों की अभिव्यक्ति अपनी मातृभाषा हिंदी में करते हैं, तो उसका अलग ही प्रभाव होता है। हमें अपने कार्यों में हिंदी का प्रयोग अधिक से अधिक करना चाहिए।
हिंदी विभाग की असिस्टेंट प्रोफेसर डा. छवि ने कहा कि हिंदी भाषा संसार की प्राचीन भाषा है। सर्वप्रथम संस्कृत और उसके बाद हिंदी का प्रादुर्भाव हुआ। हम सब हिंदी में वार्तालाप करते हैं, लेकिन यह हमारी राष्ट्रभाषा नहीं बन पाई। संविधान में किसी भी भाषा को राष्ट्रीय अधिकार नहीं दिया गया है।
हिंदी भाषा से ही अन्य भाषाओं का विस्तार हुआ है। हिंदी हमारे मन की भाषा है। इसमें व्यक्ति अपनी अभिव्यक्त पूर्णरूपेण व्यक्त कर सकता है। भारत का हिंदी संगीत एवं फिल्म सबसे ज्यादा सुना और देखा जाता है।
आज का सोशल मीडिया हिंदी के दम पर ही दर्शकों और पाठकों के मन पर अपनी छाप छोड़ रहा है। हमें हिंदी को शिरोधार्य कर उच्च पद पर प्रतिष्ठित करने का प्रयास करना चाहिए। हिंदी विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर गिरीश नारायण यादव ने कहा कि हिंदी के उत्थान और विकास की जो स्थिति होनी चाहिए वह नहीं हो पाई।
यदि हिंदी को रोजगार से नहीं जोड़ा गया तो इसका विकास करना मुश्किल होगा। कार्यालय अधीक्षक कपिल कुमार गर्ग ने कहा कि हिंदी की वर्तमान स्थिति ठीक नहीं है और दिन प्रतिदिन और खराब हो रही है। हिंदी के उत्थान के लिए हमें इसका अधिक से अधिक प्रयोग और प्रचार-प्रसार करना चाहिए।