शामली। जिले में यमुना नदी से अवैध रेत खनन को लेकर लखनऊ तक बवाल मचा हुआ है। हाईकोर्ट के आदेश पर सीबीआई जांच कर रही है। शनिवार को अमर उजाला टीम ने यमुना नदी से होने वाले अवैध खनन का सच जानने के लिए यमुना खादर का दौरा किया।
सीबीआई टीम आने के कारण कहीं पर भी अवैध रेत खनन तो नहीं मिला, मगर सहारनपुर जिले से सटे गांव लक्ष्मीपुरा से लेकर बागपत बॉर्डर पर इस्सोपुर टील तक के करीब 54 किमी के यमुना तटबंध के बीच एक दर्जन से ज्यादा स्थानों पर खनन के निशान मिले। कहीं पर यमुना नदी से रेत लाने के दौरान डंपर और ट्रैक्टर ट्रालियों के पहियों के निशान थे, तो कहीं यमुना नदी तक पहुंचने को चौड़ा रास्ता ही बनाया हुआ था।
लक्ष्मीपुरा, मंगलौरा, बिड़ौली सादान, शीतलगढ़ी ः सहारनपुर की ओर से चौसाना चौकी क्षेत्र के गांव लक्ष्मीपुरा में अवैध खनन होता रहा है। ग्रामीण सादा, रहीम आदि की मानें तो रात में यहां पर ट्रैक्टर-ट्रालियाें से अवैध खनन होता था, लेकिन कुछ दिन से बंद हो गया है।बिड़ौली चौकी से मात्र 500 मीटर की दूरी पर मंगलौरा में अवैध तरीके से रेत खनन के कारण यमुना नदी किनारे गहरे गहरे कुंड मिले। पास में ही यमुना नदी तक पहुंचने का रास्ता था, जिस पर भारी वाहनों के पहियों के निशान थे।
ग्रामीणों के अनुसार इस प्वाइंट से रात में जबरदस्त रेत खनन हो रहा था। वहीं, इसके अलावा यमुना पुल से तटबंध पर कैराना की शीतलगढ़ी/सादान में खनन के चलते यमुना नदी किनारे स्थित खेतों में फसल बोना भी दुश्वार कर दिया है। यहां के किसान इरफान की प्लेज भी नष्ट कर दी और रास्ता बना दिया। यहां भी सीबीआई के डर से फिलहाल खनन बंद मिला।