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Shamli News: जिले में बढ़ रहा हेपेटाइटिस, हर महीने मिल रहे 250 नए मरीज

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शामली। जिले में हेपेटाइटिस के मरीज बढ़ रहे हैं। हर महीने 250 से अधिक नए मरीज सामने आ रहे हैं। इस समय 600 से अधिक मरीजों का उपचार चल रहा है। ज्यादातर मरीज कैराना और कांधला ब्लाॅक के गांवों में मिल रहे हैं। चिकित्सकों का कहना है कि लक्षण नजर आते ही मरीज को जांच कर उपचार कराना चाहिए।
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हर साल 28 जुलाई को विश्व हेपेटाइटिस दिवस मनाया जाता है। इस दिवस का उद्देश्य हेपेटाइटिस की बीमारी से बचाव के लिए जागरूक करना है। जिले की स्थिति देखें तो यहां पर हेपेटाइटिस बी व सी के मरीज लगातार बढ़ रहे हैं। हर महीने 250 से अधिक मरीज सामने आ रहे हैं। वर्तमान में जिले में हेपेटाइटिस बी के 100 व हेपेटाइटिस सी के 500 से ज्यादा मरीजों का उपचार चल रहा है। सभी पंजीकृत मरीजों को जिला अस्पताल से निशुल्क दवा दी जाती हैं। ज्यादातर मरीज कैराना और कांधला ब्लाॅक क्षेत्र के गांवों में मिल रहे हैं।
सीएचसी के चिकित्सक डॉ. बिजेंद्र कुमार ने बताया रोजाना दो-तीन मरीज हेपेटाइटिस के लक्षण वाले आ रहे हैं। उन्होंने बताया संक्रमित सुई का इस्तेमाल करने से यह बीमारी फैलती है। अधिकतर झोलाछाप चिकित्सक एक सुई का बार-बार इस्तेमाल करते हैं। इससे हेपेटाइटिस होने का खतरा रहता है। हेपेटाइटिस के लक्षण नजर आते ही मरीज को जांच कर उपचार कराना चाहिए। इसमें लापरवाही बरतने पर बीमारी घातक रूप ले लेती है। उन्होंने बताया हेपेटाइटिस सी के मरीज का तीन माह तक चलता है। इसके बाद अगर बीमारी ठीक नहीं होती तो छह माह तक उपचार चल सकता है। हेपेटाइटिस बी के मरीज का उपचार एक से दो साल तक चलता है।
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- मेरठ सहारनपुर जाते हैं वायरल लोड की जांच को सैंपल
शामली। मरीजों में हेपेटाइटिस के वायरल लोड की जांच के लिए सुविधा नहीं है। हर महीने की दस और 25 तारीख को सीएचसी शामली पर शिविर लगाया जाता है। शिविर में मरीजों के सैंपल लेकर जांच के लिए मेरठ मेडिकल या सहारनपुर जिला अस्पताल भेजे जाते हैं। उनकी रिपोर्ट आने से में एक सप्ताह से अधिक समय लगता है तब तक मरीजों को सामान्य दवा दी जाती है। रिपोर्ट आने के बाद ही मरीज का सही उपचार शुरू हो पाता है।
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- लक्षण
- भूख न लगना या कम करना।
- बुखार आना।
- पीलिया होना।
- पेट फूलना।
- उल्टी होना।
- बचाव
- इंजेक्शन लगवाते समय हर बार नई सीरिंज का इस्तेमाल करें।
- अप्रशिक्षित चिकित्सक से उपचार न कराएं।
- लक्षण नजर आते ही जांच कर उपचार कराएं।
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