संवाद न्यूज एजेंसी
शामली। जिले में हर साल बुखार से कई लोगों की मौत हो जाती है, लेकिन स्वास्थ्य विभाग इससे सबक नहीं ले रहा है। डेंगू के उपचार की सुविधा तो दूर अभी तक एलाइजा जांच की सुविधा भी उपलब्ध नहीं है। यह हाल तब है कि पिछले साल डेंगू के रिकार्ड 300 केस सामने आए थे।
बरसात का मौसम आते ही संक्रामक रोगों की फैलने का खतरा बढ़ जाता है। इस मौसम में सबसे ज्यादा बुखार के मरीज बढ़ते हैं। वायरल बुखार के अतिरिक्त मच्छरजनित रोग मलेरिया, डेंगू, चिकनगुनिया, दिमागी बुखार के केस सामने आते हैं। पिछले साल 2021 में डेंगू के रिकार्ड 300 केस सामने आए थे। जिला बनने के बाद डेंगू के केस सबसे ज्यादा रहे थे। इसके अतिरिक्त मलेरिया के 57 केस मिले थे। डेंगू के मरीजों को उपचार के लिए मेरठ, दिल्ली व अन्य शहरों में जाना पड़ता है।
इस साल की बात करें तो अब तक मलेरिया के 37 केस मिल चुके हैं। पिछले महीने जुलाई में मलेरिया के नौ केस और डेंगू के संभावित चार केस मिले थे। हालांकि स्वास्थ्य अधिकारियों का कहना है कि नमूनों की एलाइजा जांच में डेंगू की पुष्टि नहीं हुई। पिछले साल कैराना, गढ़ीपुख्ता और चौसाना क्षेत्र में बुखार का प्रकोप ज्यादा रहा था। इन क्षेत्रों में कई लोगों की बुखार से मौत हुई थी। उनका उपचार निजी अस्पतालों में चलने के कारण स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों में बुखार से कोई मौत दर्ज नहीं हुई थी।
कुल मिलाकर जिले में बुखार से हर साल कई लोगों की जान जाती है, लेकिन स्वास्थ्य विभाग इससे कोई सबक लेने को तैयार नहीं है। जिले में डेंगू के उपचार की सुविधा नहीं है। सिर्फ डेंगू की कार्ड से जांच की जाती है। कार्ड से जो मरीज पॉजिटिव आता है, उसकी एलाइजा जांच के लिए सैंपल मुजफ्फरनगर व मेरठ अस्पताल में भेजे जाते हैं। जिनकी रिपोर्ट आने में कई दिन लग जाते हैं। मच्छर जनित रोगों की परामर्शदाता राजेश कुमारी ने बताया कि बरसात के मौसम में मच्छर जनित रोगों की रोकथाम के लिए जुलाई में संचारी रोग नियंत्रण माह चलाया गया। जिसमें लोगों को रोगों से बचाव और उपचार के लिए जागरूक किया गया।