गढ़ीपुख्ता। दिवाली पर मिट्टी के दीयों की मांग बढ़ गई है। गढ़ीपुख्ता में तैयार किए गए दीयों की मांग दिल्ली के अलावा हरियाणा के करनाल, जींद, सोनीपत, पानीपत और पंजाब के लुधियाना तक है। यहां ऑर्डर पर दीये, करवा आदि तैयार किए जा रहे हैं। मुस्लिम परिवार दीये और गमले आदि तैयार करने में जुटे हैं, जिन्हें दिवाली से पूर्व ही विभिन्न राज्यों में भेजा जाएगा।
कस्बे में माटी कला से 24 से अधिक मुस्लिम परिवार जुड़े हुए हैं जो घरों में मिट्टी से कलाकारी करके अपने परिवार का पालन पोषण करते हैं। जिनका व्यवसाय मिट्टी बने दीये, दिये के पंचमुखी, सतमुखी कैंडल, करवा, कुल्हों, सुराही, कसौरे और बर्तनों में दूध की हंडी, कप, गिलास, गमले, गुल्लक आदि बनाने का है। मिट्टी से निर्मित उत्पादों को यूपी सहित पंजाब, उत्तराखंड, दिल्ली, हरियाणा आदि राज्यों में सप्लाई किया जा रहा है। अब दिवाली नजदीक आते ही यहां के कारीगर दीये, गमले, गुल्लक और मिट्टी की भगवान की मूर्तियां बनाने में जुटे हुए हैं। संवाद
तौफीर ने बताया अपने माटी कला से जुड़े पुश्तैनी व्यवसाय को बदलाव के साथ आगे बढ़ाया है। हमारे यहां कई पीढि़यों से गुल्लक और दीये बनाए जा रहे हैं।
अतीक ने बताया कि खुद को समय के साथ बदलकर पुश्तैनी व्यवसाय के साथ मिट्टी के बर्तनों की बिक्री शुरू कर दी। हरियाणा, दिल्ली के लिए दीये, गमले तैयार किए जा रहे हैं।
माजिद और मौसीन ने बताया कि चिकनी मिट्टी से बनाए गए एक हजार से अधिक घड़े दिल्ली, हरियाणा और पंजाब भेजे जाएंगे।
नन्हा और हसीन ने बताया कि कस्बे से दीपावली के लिए दीये पानीपत, करनाल, मेरठ, आसपास के स्कूलों में डेकोरेशन के लिए खरीदारी होती है।
यह है रेट
इरफान ने बताया रंगीन दीया, कैंडल पंचमुखी, सतमुखी दीये 150 रुपये में बिक जाते हैं। वहीं करवा 40 -60 रुपये एवं कुल्हो, कसौरे 5 से 10 रुपये प्रति एक पीस बिक जाता है। दिवाली पर इस बार 50 प्रतिशत अधिक बिक्री होनी की उम्मीद है।