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Shamli News: जीएसटी अधिकारियों की कार्रवाई से व्यापारी नाराज

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शामली। जिले में जीएसटी टीमों द्वारा लगातार मारे जा रहे छापे से व्यापारियों और उद्यमियों में रोष बढ़ता जा रहा है। व्यापारियों का आरोप है कि अधिकारी छापों के नाम पर उत्पीड़न और वसूली कर रहे हैं, जबकि अधिकांश व्यापारी समय से जीएसटी जमा करते हैं।
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साइमा के चेयरमैन और लघु उद्योग भारती सहारनपुर मंडल अध्यक्ष अंकित गोयल ने बताया कि व्यापारी जिससे माल खरीदते-बेचते हैं, वह समय पर जीएसटी जमा करते हैं, लेकिन अगर चौथा-पांचवां खरीदार टैक्स जमा नहीं करता तो भी पहले व्यापारी को दोषी ठहराकर कार्रवाई की जाती है और उन्हें टॉर्चर किया जाता है, जबकि वे पहले ही टैक्स भर चुके होते हैं।
उन्होंने कहा कि कई बार अधिकारियों की ओर से गैरकानूनी रुपयों की मांग भी की जाती है। अंकित गोयल ने बताया कि 19 नवंबर को मामले की शिकायत लखनऊ में जीएसटी आयुक्त से भी की गई थी। आयुक्त ने जांच के बाद कार्रवाई का आश्वासन दिया था, लेकिन स्थानीय अधिकारी अभी भी अपनी मनमानी पर उतारू हैं। उन्होंने कहा कि जिलाधिकारी ने स्पष्ट निर्देश दिए थे कि एसआईबी टीमें किसी भी व्यापारी के यहां छापा मारने से पहले संबंधित एसडीएम को सूचना दें, ताकि एसडीएम मौके पर पहुंचकर कार्रवाई की निगरानी कर सकें। जीएसटी टीमें एसडीएम को सूचना देना भी जरूरी नहीं समझ रहीं, जिससे व्यापारियों में असंतोष बना हुआ है।
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व्यापारियों ने कहा कि कच्चे माल पर 18 प्रतिशत और तैयार माल पर पांच प्रतिशत टैक्स होने के कारण विभाग को 13 प्रतिशत रिफंड देना होता है, लेकिन यह रिफंड कई सालों तक लंबित रहता है। व्यापारियों का आरोप है कि रिफंड जारी करने के नाम पर भी अधिकारियों द्वारा वसूली की जाती है।

साइमा के चेयरमैन अंकित गोयल, महासचिव अमित जैन, लघु उद्योग भारती जिलाध्यक्ष आलोक जैन, रोहित गर्ग, वेदप्रकाश आर्य और आशीष अग्रवाल ने चेतावनी दी कि यदि जल्द ही जीएसटी टीमों द्वारा किए जा रहे उत्पीड़न पर रोक नहीं लगी तो उद्यमी बड़े आंदोलन को बाध्य होंगे। साथ ही कहा कि शिकायत जीएसटी विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों तक पहुंचाई जाएगी।

छापे से व्यापारी की साख पर भी असर
व्यापारी नेता अंकित गोयल ने कहा कि छापेमारी के दौरान उद्यमियों की प्रतिष्ठा को भी नुकसान होता है। कई बार वे समाज में मुंह दिखाने लायक नहीं रहते। उन्होंने कहा कि टीमें छापे जरूर मारें, लेकिन अनुचित उत्पीड़न बंद होना चाहिए।
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