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शासन ने पालिका के ईओ से मांगा स्पष्टीकरण

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शामली। नगरपालिका परिषद शामली में नियम विरुद्ध कर्मचारी को पदोन्नत कर लिपिक बनाए जाने के मामले में शासन के विशेष सचिव ने पालिका के अधिशासी अधिकारी सुरेंद्र सिंह से स्पष्टीकरण मांगा है।
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शासन के नगर विकास अनुभाग चार के विशेष सचिव धर्मेंद्र प्रताप सिंह ने नगरपालिका शामली के अधिशासी अधिकारी सुरेंद्र सिंह के नाम जारी पत्र में कहा कि पालिका में नियम विरुद्ध चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारी को लिपिक पद पर पदोन्नति दिए जाने के प्रकरण में डीएम जसजीत कौर द्वारा 27 अगस्त 2021 को कराई गई जांच रिपोर्ट में बताया गया कि इसकी जांच एडीएम वित्त एवं राजस्व शामली द्वारा कराई गई। एडीएम ने 17 अगस्त को डीएम को उपलब्ध कराई जांच रिपोर्ट में कहा कि शासनादेश व उप्र सरकारी विभाग लिपिकीय संवर्ग सेवा नियमावली 2014 से स्पष्ट है कि समूह ‘घ’ के कर्मचारियों की कनिष्ठ लिपिक पद पर पदोन्नति 20 प्रतिशत सीमा के अंतर्गत शर्तों के अनुसार की जा सकती है। शामली पालिका में लिपिक पद के कुल स्वीकृत 13 पद के सापेक्ष 20 प्रतिशत की सीमा 2.6 यानि अधिकतम तीन चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों को लिपिक पद पर पदोन्नत कर रखा जा सकता है।
लेकिन जांच से स्पष्ट है कि अमित कुमार के लिपिक पद पर पदोन्नति के पहले चार चतुर्थ श्रेणी कर्मियों की पदोन्नति की जा चुकी थी। इस तरह से पांचवें पदोन्नत अमित व चौथे पदोन्नत कर्मी लक्ष्मण सिंह की पदोन्नति अनियमित पाई गई। अमित कुमार को लिपिक पद पर पदोन्नत देकर नियुक्ति करने का उत्तरदायित्व नियुक्ति अधिकारी नगरपालिका अध्यक्ष अंजना बंसल द्वारा शासनादेशों और नियमावली के विरुद्ध कार्य और अपने अधिकारों का दुरुपयोग किया जाना पाया गया। पत्रावली पर उस समय के सामान्य लिपिक प्रदीप कुमार व अधिशासी अधिकारी सुरेंद्र सिंह के हस्ताक्षर है। डीएम ने शासन को भेजी रिपोर्ट में कार्रवाई की संस्तुति की थी। विशेष सचिव ने इस प्रकरण में पालिका के अधिशासी अधिकारी सुरेंद्र सिंह से 15 दिन के अंदर स्पष्टीकरण मांगा है। उधर, अधिशासी अधिकारी सुरेंद्र सिंह का कहना है कि अभी उन्हें इस संबंध में शासन की तरफ से कोई पत्र नहीं मिला है।
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शासन से हुआ था आरोप पत्र जारी
ईओ सुरेंद्र सिंह के खिलाफ शासन ने कुछ दिन पूर्व ही आरोप पत्र जारी किया था। शासन के प्रमुख सचिव अमृत अभिजात ने सहारनपुर मंडल के अपर आयुक्त प्रशासन को जांच अधिकारी नामित करते हुए 15 दिन में रिपोर्ट मांगी थी। ईओ पर डोर टू डोर कूड़ा कलेक्शन के टेंडर में अनियमितता और मृत पशुओं के निस्तारण के लिए कोई उचित व्यवस्था नहीं किए जाने का आरोप लगा था। इस मामले में डीएम ने 20 जून को ईओ के खिलाफ कार्रवाई की संस्तुति करते हुए शासन को रिपोर्ट भेजी थी।
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