शामली। कृषि विधेयकों पर मचे बवाल के बीच सरकार ने रबी की फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य घोषित कर दिए हैं। गेहूं का एमएसपी 50 रुपये की बढ़ोतरी कर 1975 रुपये प्रति क्विंटल घोषित करने से किसान खुश हैं लेकिन उनका कहना है कि इसका लाभ देने के लिए सरकार को गेहूं की खरीद बढ़ानी होगी क्योंकि खुले बाजार में तो गेहूं के दाम बेहद कम चल रहे हैं।
किसान ठाकुर ओमकार सिंह कहते हैं कि गेहूं का न्यूनतम समर्थन मूल्य बढ़ाना ठीक है। इस समय तो खुले बाजार में गेहूं के दाम बेहद कम चल रहे हैं। शामली जनपद के किसानों को हरियाणा में अपना गेहूं बेचना पड़ता है। सरकार को गेहूं खरीद केंद्र बढ़ाने चाहिए।
गांव हसनपुर लुहारी निवासी अमित सैनी का कहना है कि गेेहूं के न्यूनतम समर्थन मूल्य में बढ़ोतरी होने से किसानों को फायदा पहुंचेगा। 50 रुपये क्विंटल की बढ़ोत्तरी से किसान की आय में इजाफा होगा। सरकार को इसी तरह से किसान हित में और भी निर्णय लेने चाहिए।
गांव नागल निवासी सोनी कुमार कहते हैं कि गेहूं का न्यूनतम समर्थन मूल्य कम से कम दो हजार रुपये होना चाहिए। बाजार में राशन का गेहूं आ जाने से गेहूं के दाम गिरे हुए हैं। सीजन में गेहूं खरीद पर राज्य सरकार को अपनी ओर से भी इंसेंटिव भी देना चाहिए।
किसान चौधरी सतेंद्र रोड का कहना है कि सरकारी गेहूं खरीद केंद्रों पर किसानों का गेहूं खरीदने में आनाकानी की जाती है। बिचौलिए हावी रहते हैं। सरकार को गेहूं खरीद की व्यवस्था में सुधार करना चाहिए तथा सभी किसानों का गेहूं केंद्रों पर खरीदा जाए।