शामली। पशुओं को गर्मी के प्रकोप (हीट स्ट्रेस) से बचाना बहुत ही जरूरी है। वरना दुधारु पशुओं का दूध भी कम होने लगता है। मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डा. चंद्रभानू कश्यप ने किसानों को पशुओं को गर्मी के प्रकोप से बचाने के लिए सावधानी बरतने की सलाह दी है। मुख्य पशु चिकित्साधिकारी ने बताया कि यदि पशु पक्षी बहुत हांफ रहा हो, कमजोरी और थकान महसूस कर रहा हो, मुंह से लार टपक रही हो, उसके हृदय की गति बढ़ गई हो और वह निहाल पड़ गया हो तो यह लक्षण गर्मी से होने वाले हीट स्ट्रेस के हैं। तत्काल नजदीकी पशु चिकित्सा अधिकारी से संपर्क करें और इलाज कराए।
भार ढोने वाले या काम करने वाले पशुओं को गर्मी के समय 12:00 बजे से 3:00 तक अवश्य आराम दें । 37 डिग्री से अधिक तापमान होने पर इस नियमों का पालन अवश्य करें। अन्यथा पशुओं के प्रति क्रूरता का अपराध माना जाएगा। अपने पालतू पशुओं को दिन में एक बार जरूर नहलाएं। छायादार स्थान पर ही रखें। गर्म हवा के सीधे संपर्क में आने से रोकने के लिए पर्दे लगाए। टीन शेड के घर बने हो तो उसे पर घास, पराली आदि डाल दें जिससे छत गर्म ना हो। पालतू पशुओं को नियमित रूप से नमक, संतुलित पशु आहार मिनरल मिक्सर प्रति दिन दें। इससे दुधारू पशुओं के दूध में कमी नहीं आएगी। पशुओं में स्ट्रेस नहीं होगा। स्ट्रेस आने से प्रतिरोधक क्षमता में कमी आ जाती है और विभिन्न प्रकार की बीमारियां होती है।