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किताबों से बढ़ रही दूरी, मोबाइल व इंटरनेट बन गए दोस्त

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शामली। कंप्यूटर और मोबाइल के दौर में बच्चे किताबों से दूर हो रहे हैं। पुस्तकों के प्रति उनका प्रेम लगातार कम हो रहा है। एक समय में इंसान की सबसे अच्छी दोस्त कही जाने वाली किताबों की जगह अब मोबाइल और इंटरनेट ने ले ली है। कॉलेजों के पुस्तकालयों में भी अब सन्नाटा पसरा रहता है।
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पुस्तकालय की कहानियां और किताबों से प्यार, ये गुजरे जमाने का किस्सा बन गया है। पुरानी पीढ़ियां किताबों को अपना दोस्त समझती थी। बुजुर्गों की मानें तो पहले के लोग दिन के कई घंटे पुस्तकालय में गुजार देते थे। लेकिन आज की युवा पीढ़ी किताबों से बहुत दूर हो चुकी है। इस पीढ़ी के कई युवा ऐसे भी हैं, जिन्होंने पुस्तकालय का दरवाजा तक नहीं देखा। यह पीढ़ी सोशल नेटवर्किंग साइटों को दोस्त ही नहीं, बल्कि अपनी जिंदगी समझने लगी है। इसका नतीजा है कि स्कूली बच्चे सिर्फ अपने पाठ्यक्रम की किताबें ही पढ़ रहे हैं। साहित्य की दुनिया से बच्चे और अभिभावक दोनों ही दूर हो रहे हैं।
कोरोना काल में भी बढ़ी किताबों से दूरी
कोरोना काल में रही सही कसर ऑनलाइन क्लास ने पूरी कर दी। दो वर्ष तक किताबों की जगह बच्चों की पढ़ाई मोबाइल के माध्यम से पूरी हुई। ऐसे में बच्चों की किताबों से दूरी और भी बढ़ गई। जिस तरह से मोबाइल और लैपटॉप का प्रयोग बढ़ा है, उससे भी पुस्तकों के प्रति युवाओं का रुझान कम हुआ है। अब मोबाइल ही युवाओं का एक अच्छा दोस्त बन गया है।
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15 फीसदी छात्र ले रहे लाइब्रेरी का लाभ
जिले में 10 से ज्यादा डिग्री कॉलेज हैं। जहां पर बेहतरीन पुस्तकों का संग्रह उपलब्ध है। इन कॉलेजों में कई अच्छी पुस्तकों का संग्रह भी है, लेकिन कॉलेजों से छात्र-छात्राओं में से सिर्फ 15 फीसदी ही पुस्तकों का इस्तेमाल करते हैं। युवा वर्ग पुस्तकालयों के आस-पास भी दिखाई नहीं देता।
पुस्तकालयों से युवा पीढ़ी को जोड़ कर रखने के लिए वाचनालयों को परंपरागत के साथ ई-लाइब्रेरी में तब्दील कर देना चाहिए। सोशल मीडिया के दौर में पुस्तकों की अहमियत को बरकरार रखना ही होगा। पुस्तकों पर बढ़ रही महंगाई भी खत्म करनी होगी। -इंदू शर्मा, प्रवक्ता जैन इंटर कॉलेज।
भागदौड़ भरे जीवन में साहित्य पीछे छूट रहा है। भविष्य बनाने की दौड़ में युवा अपने साहित्य, इतिहास और धर्म से परिचित नहीं होना चाहता। इसके लिए जरूरी है कि बचपन से ही साहित्य के प्रति रूझान बढ़ाया जाए, जिससे कि पुस्तकोें के प्रति लगाव बना रहे। -श्रवण तोमर, प्रवक्ता राष्ट्रीय किसान इंटर कॉलेज।
आजकल पढ़ने की प्रवृति बच्चों में कम होती जा रही है। पुस्तकों से बच्चे दूर भाग रहे हैं। सब कुछ नेट पर ही खंगालना चाहते हैं। बच्चों को पाठ्यक्रम के अलावा अन्य पुस्तकें पढ़ाने के लिए भी प्रेरित करते हैं। मुकेश कुमार, अभिभावक।
कोरोना काल में इंटरनेट और मोबाइल के अधिक इस्तेमाल ने बच्चों के शिक्षा प्रणाली को काफी प्रभावित किया है। बच्चों को किताबें पढ़ने की आदत डालने का प्रयास करते हैं। रविंद्र कुमार, अभिभावक।
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