शामली। कोरोना संक्रमण काल में चिकित्सकों ने खुद की जान की परवाह न करके अपना चिकित्सीय धर्म निभाया। कई चिकित्सक कोरोना संक्रमित हुए, लेकिन ठीक होने के बाद फिर ड्यूटी पर लौट आए। कोरोना काल में मरीजों की सेवा करने वाले चिकित्सक सेवाभाव और व्यवहार की मिसाल हैं।
कोरोना से बचाव के लिए कर रहे जागरूक
आइएमए शामली के अध्यक्ष एवं बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. अकबर खान ने कोरोना काल में ओपीडी के साथ टेलीमेडिसिन के माध्यम से बच्चों का उपचार किया। उन्होंने यू ट्यूब चैनल के माध्यम से लोगों को कोरोना संक्रमण के बारे में जानकारी दी और बचाव के तरीके बताते हुए जागरूक किया। कोरोना काल में लोगों को इसका लाभ मिला।
मां सावित्री हॉस्पिटल के मुख्य चिकित्सक डॉ. रीतिनाथ शुक्ला ने कोरोना काल में गरीब, जरूरतमंद लोगों को दवा, मास्क और राशन किट उपलब्ध कराई। इसके अलावा वे करीब तीन माह से कोविड कंट्रोल एंड कमांड सेंटर पर चिकित्साधिकारी के रूप में ड्यूटी दे रहे हैं। सेंटर पर कोरोना को लेकर आने वाली मरीजों से संबंधित समस्याओं का समाधान कर रहे हैं।
कोरोना संक्रमित होने पर भी निभाया ड्यूटी का फर्ज
सीएमओ कार्यालय में तैनात महामारी रोग विशेषज्ञ डॉ. शाइस्ता नाज ने संचारी रोग नियंत्रण का कार्य करने के साथ कोरोना काल में संक्रमित मरीजों का डाटा तैयार करने का काम किया। इस दौरान वे खुद कोरोना संक्रमित हो गईं। इस दौरान उन्होंने घर से ही काम करती रही। कोरोना से ठीक होने पर 11 दिन बाद ही फिर से अपनी ड्यूटी पर आकर कार्यालय में काम शुरू किया।
कोविड अस्पताल में दिन-रात मरीजों की देखभाल
कोरोना काल में राजकीय महिला अस्पताल में तैनात वरिष्ठ निश्चेतक डॉ. जगमोहन को शामली के कोविड एल-2 अस्पताल में संबद्ध किया गया। 29 अप्रैल को उन्होंने शामली पहुंचकर वेंटिलेटर चलाने की जिम्मेदारी संभाली और दिन रात ड्यूटी पर डटे रहे। इसके साथ ही सीएचसी शामली में महिलाओं के आपरेशन के दौरान भी ड्यूटी का फर्ज निभा रहे हैं। कोरोना के केस कम होने पर अब तीन दिन उनकी ड्यूटी सहारनपुर रहती है।
लापरवाही के आरोप, चिकित्सा सेवा पर उठे सवाल
शामली। एक तरफ कोरोना काल में जहां चिकित्सक सेवाभाव से जुटे रहे, वहीं लापरवाही के भी आरोप लगते रहे, जिससे चिकित्सीय सेवा पर सवाल उठे।
पांच मई को गांव हरड़ फतेहपुर निवासी सत्यवान सिंह को सांस लेने में परेशानी होने पर परिजनों ने कोविड अस्पताल में भर्ती कराया था। देर रात में उनकी मौत हो गई थी। परिजनों ने अस्पताल में हंगामा करते हुए आरोप लगाया था कि स्वास्थ्य कर्मचारी संजय ने उनसे ऑक्सीजन सिलिंडर के नाम पर 50 हजार रुपये की मांग की। परिजनों ने उस समय 10 हजार रुपये देकर बाकी रकम सुबह देने को कहा।
परिजनों का आरोप है कि कुछ देर बाद सिलिंडर से गैस खत्म हो गई, जिससे मरीज की मौत हो गई। मृतक की पत्नी ममतेश की तरफ से आदर्श मंडी थाने पर स्वास्थ्य कर्मी के विरुद्ध भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज हुआ था, जिसकी जांच सीओ सिटी प्रदीप सिंह कर रहे हैं।
करीब तीन माह पहले बुढ़ाना रोड स्थित नर्सिंग होम पर दुर्घटना में घायल बच्चे की मौत होने पर परिजनों ने हंगामा करते हुए इलाज में लापरवाही का आरोप लगाया था। इससे पहले भी कई ऐसे मामले सामने आ चुके हैं, जिसे लेकर चिकित्सक व मरीजों के बीच विश्वास कम हुआ है।