फाइलेरिया रोग की गिरफ्त में शामली जिला भी आ गया है। जिले में नौ साल से लेकर 14 साल के 291 बच्चों का स्वास्थ्य परीक्षण किया गया। परीक्षण के बाद चार बच्चों में फाइलेरिया रोग के लक्षण पाए गए। इससे स्वास्थ्य विभाग में खलबली मच गई।
लखनऊ से संयुक्त निदेशक डॉक्टर विकास सिंघल और प्रशिक्षक अमित कुमार शुक्ला के नेतृत्व में टीम शुक्रवार को जिला मुख्यालय पहुंचेगी। फाइलेरिया रोग का पता लगाने के लिए बृहस्पतिवार को जिले के नौ साल से चौदह साल तक के 291 बच्चों की स्वास्थ्य विभाग की आठ टीमों ने परीक्षण किया था। इस दौरान चार बच्चों में डेंगू मच्छर के काटने से फैलने वाले फाइलेरिया के लक्षण पाए गए। जिला मलेरिया अधिकारी डॉक्टर विनय कुमार ने बताया कि 291 बच्चों के परीक्षण में कांधला में एक, शामली नगरीय में एक, कुड़ाना सीएचसी के भैसवाल गांव में दो बच्चों में लक्षण मिले हैं। उन्होंने बताया कि शामली के बरखंडी, गुजरातियान, झिंझाना क्षेत्र के मंसूरा, बसी चुधियारी, कैराना के अलीपुर, भैसवाल थानाभवन क्षेत्र कैल शिकारपुर गांवों में भी बच्चों के स्वास्थ्य का परीक्षण किया गया। परीक्षण टीम में एसीएमओ डाक्टर अनिल कुमार, डाक्टर अरविंद कुमार, हेल्थ सुपरवाइजर शफी उल्ला खां शामिल रहे। उन्होंने बताया कि बृहस्पतिवार से बीस नवंबर तक फाइलेरिया रोग के बच्चे को रक्त परीक्षण करके रोग का सत्यापन शुरू हो गया है। उन्होंने बताया कि शुक्रवार को लखनऊ से संयुक्त निदेशक डाक्टर विकास सिंघल व प्रशिक्षक अमित कुमार शुक्ला के नेतृत्व में टीम जिला मुख्यालय पर पहुंच जाएगी। उधर, फाइलेरिया रोग का पता लगाने के लिए जिले के 480 बच्चों का रक्त प्रशिक्षण किया जाएगा। वहीं, स्लाइड बनाकर दवा वितरित की जाएगी।
इस तरह फैलता है फाइलेरिया
फाइलेरिया संक्रमित मच्छर के काटने से होता है। परजीवी कीड़े किसी व्यक्ति के रक्त में चले जाते हैं तो वह लिम्फेटिक प्रणाली (नसों और नोड्स) को प्रभावित करते हैं। वयस्क कीड़े लिंफ की नसों में 4-6 साल तक रहते हैं। मादा कीड़े खून में लार्वा को जन्म देते हैं, जिससे इनकी संख्या बढ़ती रहती है। एक मच्छर किसी पीड़ित व्यक्ति को काटने के बाद दूसरे व्यक्ति को काट ले तो यह रोग फैलता है।
फाइलेरिया के लक्षण
फाइलेरिया से शुरुआत में कोई लक्षण महसूस नहीं होते। समस्याएं तब शुरू होती हैं जब शरीर में वयस्क कीड़े मर जाते हैं। बीमारी से गुर्दे प्रभावित हो जाते हैं। पैरों व शरीर के अन्य हिस्सों में सूजन, स्तन और जननांग में सूजन, त्वचा पर लाल चकत्ते, त्वचा के रंग में बदलाव, रिवर ब्लाइंडनेस, पेट में दर्द आदि परेशानियां होने लगती हैं। लंबे समय तक सूजन से शरीर में विकलांगता आ जाती है।
बीमारी से बचने के उपाय
- ठंडे कमरे में सोएं।
- मच्छरदानी का प्रयोग करें।
- पूरी आस्तीन के कपड़े पहनें।
- मच्छरों से बचने के लिए त्वचा पर दवाइयों का उपयोग करें।
- क्षेत्र में ऐसी सूक्ष्म कीड़ों को मारने वाली दवाइयों का छिड़काव करें।
- बीमारी के लक्षण नजर आने पर योग्य चिकित्सक को दिखाएं।
दूसरे जनपदों या प्रदेश से आने वाले संक्रमित व्यक्ति से फाइलेरिया के फैलने की आशंका है। इसके लिए बीमारी की जांच को अभियान चलाया जाएगा। जिले में 30 स्कूलों के 16-16 बच्चों की जांच की जाएगी।
अलका सिंह, मुजफ्फरनगर जिला मलेरिया अधिकारी।