पुरानी किताबों के सहारे पढ़ने को मजबूर
ऊन। शिक्षा सत्र शुरू हुए 5 माह गुजर चुके हैं, लेकिन अभी तक बच्चों को किताबें नहीं मिली हैं। बच्चों को फटी-पुरानी किताबों से ही शिक्षा ग्रहण करनी पड़ रही है। कई कक्षाओं की तो एक भी किताब नहीं आई है। ऐसे में शिक्षा व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं।
प्राथमिक शिक्षा का सत्र 5 माह पहले शुरू हुआ था, लेकिन अभी तक परिषदीय स्कूलों में बच्चों को किताबें नहीं मिली हैं, ब्लॉक में कुल 181 स्कूलों में 22,635 छात्र अध्ययनरत है, जिनमें जूनियर कक्षाओं में कक्षा सात की कोई किताब अभी तक नहीं मिली है। कक्षा छह में तीन विषयों की किताब आई है। कक्षा 8 की सभी किताबें आ चुकी हैं, इसके अलावा कक्षा एक की किताबें नहीं आई हैं। बाकी कक्षाओं की भी अभी तक आधी अधूरी किताबें आई हैं, जिससे बच्चों की पढ़ाई बाधित हो रही है। अंग्रेजी माध्यम के ब्लॉक में 19 विद्यालय हैं, जिनकी कोई किताब अभी तक नहीं आई है। ऐसे में पढ़ाई कैसे चल रही है, यह भी अपने आप में सवाल है। किताबें न मिलने से बच्चों को पुरानी फटी किताब से ही काम चलाना पड़ रहा है। कुछ बच्चों पर किताबें ही नहीं है। इस संबंध में खंड शिक्षा अधिकारी विश्वास कुमार ने बताया कि अभी तक करीब 60 प्रतिशत किताबें मिली हैं जिन का वितरण किया गया है। कक्षा 1 व 7 अंग्रेजी माध्यम की कोई किताब अभी तक नहीं आई है। किताबें मिलते ही वितरण किया जाएगा।