शामली। वैसे तो बच्चों की पहली शिक्षक मां होती है, लेकिन बच्चों के उज्ज्वल भविष्य की नींव रखना पिता की जिम्मेदारी मेें आता है। जब पिता स्वयं एक अपने सिद्धांतों पर चलने वाले अध्यापक हों तो फिर तो बच्चों की नींव मजबूत होना तय हैै। जिले में ऐसे कई पिता हैं जिनकी मेहनत, सीख, तजुर्बे के दम पर आज कई बेटे भी बुलंदियों के मुकाम पर हैं। किसी ने उद्योग के क्षेत्र में पांच लाख के टर्न ओवर से 70 करोड़ तक पहुंचाया। तो कहीं सरकारी शिक्षक के बेटे आईएएस अफसर भी बने। किसी ने खेल के क्षेत्र में डंका बजाया। जिले में ऐसे कई पिता पुत्र हैं। फादर्स-डे के मौके पर हम आज आपको ऐसे ही पिता पुत्रों की सफलता की कहानी बताएंगे। पेश है एक रिपोर्ट।
जैन परिवार के दो भाइयों के तीन बेटों ने छुआ कामयाबी का शिखर
शामली। शहर निवासी जगजोत जैन ने जेएस जैन एग्रो इंडस्ट्री प्राइवेट लिमिटेड के नाम 1975 में मुजफ्फरनगर रोड पर सिर्फ दो बीघा जमीन में बैलगाड़ी के रिम बनाने की फैक्टरी लगाई थी। अनुमान के तौर पर जब मुश्किल से पांच लाख सालाना टर्न ऑवर था। 1991 में जगजोत जैन का निधन हो गया था। उनके बाद जेके जैन, आलोक जैन और आशीष जैन ने फैक्टरी को संभाला। काम को बढ़ाते रहे, बुग्गी से ट्रैक्टर ट्रॉली, फिर ट्रैक्टर रिम बनाए। इसके बाद आलोक जैन के बेटे वरुण अमेरिका से इंजीनियरिंग की मास्टर डिग्री लेकर 2009 वापस लौटे। उसने बड़ी हाईटेक प्लांट लगाने की इच्छा जताई। पिता को बेटे के हुनर पर भरोसा था। 2011 में कैरियर व्हील्स प्राइवेट लिमिटेड के नाम से फैक्टरी लगाई। 2012 में छोटा बेटा तरुण जैन 2012 में दिल्ली से सीए करके आया और फैक्टरी के लेखाजोखा का काम संभाला। आलोक जैन के भाई आशीष के बेटे अपूर्व ने भी मणिपाल से इलैक्ट्रिॉनिक इंजीनियरिंग की और लौटकर फैक्टरी में काम संभाला। दो भाईयों और उनके तीन बेटों की बदौलत आज फैक्टरी में ट्रैक्टर कंपनियों को ट्रैक्टर रिम, हार्वेस्टर कंबाइन, ऑफ रोड व्हीकल, बना रहे हैं। जर्मनी, फ्रांस और इंग्लैंड में एक्सपोर्ट कर रहे हैं। बकौल आलोक जैन उनकी फैक्टरी का आज 70-80 करोड़ का टर्न ओवर है। आज यहां से 500 से अधिक लोगों को रोजगार मिल रहा है।
- धर्मपाल सिंह के दो बेटे आईएएस और एक है बिजनेसमैन
थानाभवन। कस्बे के धर्मपाल सिंह के दो बेटे आज आईएएस बनकर देश की सेवा कर रहे हैं और तीसरा बेटा इंपोर्ट, एक्सपोर्ट का बिजनेस कर रहा है। धर्मपाल सिंह ने बताया कि मूल रूप से वह किसान परिवार से ताल्लुक रखते हैं। वह एक बुढ़ाना के स्कूल में सरकारी शिक्षक नियुक्त हुए। उनकी दिखाई राह का जिसका परिणाम है कि छोटा बेटा अमित वर्ष 2012 में आईएएस की परीक्षा पास कर गया। फिलहाल अमित बिहार के पटना में लोक निर्माण विभाग में विशेेष सचिव के पद पर देश की सेवा कर रहा है। जबकि, बड़े बेटे आशीष ने वर्ष 2014 में आईएएस की परीक्षा पास की। फिलहाल आशीष की पोस्टिंग गुजरात राज्य में हैं। वहां आशीष गोदरा में अपर जिलाधिकारी के पद पर अपनी सेवाएं दे रहे हैं। बता दें कि अमित इससे पहले इनकम टैक्स विभाग में नौकरी करते थे, लेकिन उन्होंने फिर आईएएस की परीक्षा पास की। इनका एक अन्य भाई राजस्थान के जयपुर में वुड क्राफ्टिंग का काम करता है।
पिता के दिए हौसले से मिली कामयाबी
शामली। जनपद के गांव सकौती निवासी कपिल मलिक ने खेल के दम पर सेना में भर्ती होने की कामयाबी हासिल की है। नेशनल शूटर कपिल के सुनील मलिक लिब्बरहेड़ी चीनी मिल में उप महाप्रबंधक गन्ना के पद पर कार्यरत हैं। कपिल ने बताया कि मेरी पहले से ही खेल में रुचि थी। पढ़ाई से ज्यादा ध्यान खेल पर रहता था। पहले तो परिजनों ने मेरे ऊपर पढ़ने का दबाव बनाया, लेकिन मेरे पिता ने खेल में रुचि देखते हुए मेरा हौसला बढ़ाया। जब मैं कक्षा नौ में था तो मेरे पिता ने मुझे शामली की शूटिंग रेंज में भेज दिया। स्कूल के बाद मैं रेंज पर जाकर निशानेबाजी का प्रशिक्षण लेने लगा। वहां पहले मेरा मन नहीं लगा तो पिता ने मुझे बताया कि इस खेल में अगर उसने अच्छा प्रदर्शन कर लिया तो मेरा करियर बन जाएगा। समय-समय पर पिता ने मेरी हिम्मत बढ़ाते रहे। अगर मैं किसी प्रतियोगिता में सफल नहीं हो सका तो भी उन्होंने मुझे निराश नहीं होने दिया। इसके बाद मैंने राष्ट्र स्तरीय कई प्रतियोगिताओं में सफलता प्राप्त की। शूटिंग के साथ मैने इंटर की परीक्षा पास की और पिछले साल नवंबर माह में शूटिंग के दम पर मेरा चयन आर्मी में असम रेजीमेंट शिलांग में हो गया। आज मैं जो भी कुछ हूं अपने पिता के दम पर हूं। मुझे अपने पिता से यही सीख मिली है कि जो भी काम करों मन लगाकर करो, सफलता जरूर मिलेगी।
---
पिता की सीख : मेहनत करो तो सफलता जरूर मिलेगी
शामली। शामली की कांबोज कालोनी निवासी नेशनल शूटर शिवम राणा ने बताया कि खेल कोटे से मेरा इसी साल एयरफोर्स वाई ग्रुप में चयन हुआ है। शिवम ने बताया कि पिता पप्पू राणा अग्निशमन विभाग में चालक हैं। उन्होंने मेरी रुचि को देखते हुए शूटिंग रेंज में प्रशिक्षण के लिए भेजा था। पढ़ाई के साथ मैंने शूटिंग का प्रशिक्षण लिया। शुरूआत में मैं जब प्रतियोगिता में खेलने गया तो मुझे सफलता नहीं मिली। उस समय मेरे पिता ने मेरा हौसला बढ़ाया। कहा कि आज सफलता नहीं मिली तो क्या हुआ। मेहनत करते रहो, सफलता एक दिन जरूर मिलेगी। इसका नतीजा यह हुआ कि मैं नेशनल स्तर की प्रतियोगिता में सफल हुआ। शूटिंग के साथ मैने पढ़ाई भी की। पिता समय-समय पर उनका हाल-चाल लेते और उनसे मित्र जैसा व्यवहार कर उनका हौसला बढ़ाते थे। खेल में पिता ने मुझे बहुत सपोर्ट किया। उनकी वजह से मेरा चयन एयरफोर्स में हुआ है। मेरे पिता मेरी शान हैं।
आईएएस आशीष कुमार- फोटो : ?????
आईएएस आशीष व अमित के पिता धर्मपाल सिंह- फोटो : shamli
फादर्स डे पर विशेष खबर का फोटो शामली में अपने बेटों के साथ उद्यमी आलोक जैन और आशीष जैन- फोटो : SHAMLI
शामली खिलाड़ी शिवम राणा- फोटो : SHAMLI