चौसाना/बिडौली (शामली)। हरियाणा सीमा पर किसानों की परेशानी लगातार बढ़ती जा रही है। रविवार को पांचवें दिन भी किसान अपनी फसलों से लदी ट्रैक्टर-ट्रालियों के साथ बिडौली पुल पर कतार में खड़े रहे, लेकिन हरियाणा की मंडियों में प्रवेश नहीं मिल सका।
कई किसान पिछले कई दिनों से वहीं डटे हुए हैं, जबकि दर्जनों किसान मजबूरी में अपनी फसल वापस घर ले जा चुके हैं। रविवार को भी स्थिति जस की तस बनी रही और प्रशासन की ओर से कोई ठोस समाधान नहीं हुआ।
किसानों का कहना है कि सुबह से ही करीब सौ से अधिक ट्रैक्टर-ट्रालियां पुल पर खड़ी रहीं। भीषण गर्मी, भूख-प्यास और लंबी प्रतीक्षा के बीच किसान अपनी बारी का इंतजार करते रहे। कुछ किसानों ने आरोप लगाया कि हरियाणा पुलिस द्वारा उनके साथ अभद्रता और मारपीट भी की गई, जिससे नाराज किसानों ने पुल पर ही विरोध प्रदर्शन किया। किसानों का कहना है कि उन्हें बार-बार आदेशों का हवाला देकर रोका जा रहा है।
इसलिए लगाई है हरियाणा सरकार ने रोक
किसान बलबीर सिंह, मनोज कुमार ने बताया कि हरियाणा सरकार द्वारा पहले से ही बाहरी राज्यों की फसल खरीद पर रोक लगाई गई है और मेरी फसल मेरा ब्योरा पोर्टल पर पंजीकृत किसानों को ही मंडियों में बिक्री की अनुमति दी गई है। इसी के चलते यूपी के किसानों की फसल को सीमा पर रोक दिया गया है।
कड़े पहरे में सीमा, मजिस्ट्रेट तैनात कर बढ़ाई सख्ती
डिप्टी कमिश्नर करनाल ने आदेश जारी कर हरियाणा सरकार के एक अप्रैल के फैसले का हवाला देते हुए अन्य प्रदेशों की गेहूं खरीद पर रोक को सख्ती से लागू करने के निर्देश दिए हैं। मंडियों में भीड़ अधिक होने के कारण यमुना पुल, शेरगढ़ टापू व मंगलौरा चेक पोस्ट पर नाकेबंदी कर किसानों को रोका जा रहा है।
भूखे-प्यासे खड़े हैं, सुनवाई नहीं हो रही
बिडौली पुल पर फसल लेकर खड़े किसानों का दर्द रविवार को भी झलकता रहा। जैनपुर निवासी जयप्रकाश ने बताया कि 24 घंटे से अधिक समय से खड़े हैं, लेकिन प्रवेश नहीं दिया जा रहा। रजत चौधरी (तीतरो, सहारनपुर) ने कहा कि कई दिनों से इंतजार में हालात बिगड़ रहे हैं। शमशाद (फतेहपुर) ने कहा कि हर बार फसलों पर रोक लगाकर किसानों को नुकसान पहुंचाया जाता है। सुखचैन (मुस्तफाबाद) और वीरेंद्र (तिसंग) ने आरोप लगाया कि पंजीकरण होने के बावजूद मंडी में प्रवेश नहीं मिल रहा।