केस-2
बागपत के बड़ौत निवासी पंकित के आधार कार्ड के माध्यम से फर्म रजिस्टर्ड कराई गई। जांच की तो पता चला कि पंकित मजदूरी करता है और उसने कभी फर्म रजिस्टर्ड नहीं कराई। फर्म रजिस्टर्ड कराने में उसके आधार कार्ड का इस्तेमाल किया गया था।
केस-3
शामली के पंकज के नाम से फर्म रजिस्टर्ड कराई गई। जांच की तो क्लीनिक चलता मिला और पंकज ने किसी भी फर्म के रजिस्ट्रेशन की बात से इनकार कर दिया। ये तीन मामले तो बानगी भर मात्र है। विभागीय अधिकारियों की जांच में सामने आया है कि बोगस फर्में बनाई गई थीं। जांच में सामने आया कि एक मोबाइल नंबर पर पांच से छह फर्म भी रजिस्टर्ड कराई गई थी जो जांच में बोगस निकली।
इस तरह शातिर करते हैं खेल
सहायक आयुक्त, केंद्रीय वस्तु एवं सेवा कर मंडल शामली के तापस चक्रवर्ती ने बताया कि फर्जी कागजातों के आधार पर फर्जी कंपनी बनाई जाती है। इसी फर्जी कंपनी के माध्यम से अन्य को अपने साथ जोड़कर लेनदेन किया जाता है। गिरोह दो तरीके से फ्रॉड करता था। गिरोह की पहली टीम फर्जी दस्तावेज जैसे आधार कार्ड, पैन कार्ड, बिजली बिल आदि का इस्तेमाल कर फर्जी कंपनी बनाती है। इसके बाद इसका जीएसटी नंबर लिया जाता था। वहीं, दूसरी टीम फर्जी कंपनी के नाम पर फर्जी बिल बनवाकर जीएसटी रिफंड प्राप्त कर सरकार को चूना लगाती है।
मौके पर खाली प्लॉट
अनाज मंडी में टीम फर्म की जांच के लिए टीम पहुंची तो कहीं खाली दुकान मिली, जिसे किराए पर देने की सूचना अंकित थी और मोबाइल नंबर दिया गया था। गारमेंट की फैक्टरी की जगह खाली प्लॉट मिला। इस पर कूड़ा डाला जा रहा था।
शातिरों तक पहुंचना मुश्किल
बोगस फर्मों के मालिकों तक पहुंचना आसान नहीं है। ये जालसाज जीएसटी पंजीकरण के लिए दूसरों के दस्तावेज इस्तेमाल कर रहे हैं। एक फर्म बिजली बिल पर पंजीकृत कराई गई। इसी तरह अन्य फर्मों में दूसरे लोगों के आधार कार्ड और पैन कार्ड इस्तेमाल किए गए। ये जालसाज सिम कार्ड भी दूसरों के दस्तावेज पर लेते हैं।
भारी पड़ रहा सत्यापन न करना
बोगस फर्मों के पूरे खेल में अफसरों की लापरवाही भी सामने आ रही है। जो फर्म मौके पर है ही नहीं, उसका पंजीकरण कर दिया जा रहा है। अगर पंजीकरण से पहले मौके पर जाकर सत्यापन किया जाए तो पूरा खेल उसी समय पकड़ा जाए और बोगस फर्म खुल ही न पाए। आईटीसी क्लेम पर शक होने के बाद अधिकारी जांच के लिए जाते हैं।