शामली। सरकार नए उद्योग लगाने के लिए उद्यमियों को लगातार प्रोत्साहित कर रही है, लेकिन शामली में औद्योगिक जमीन की आसमान छूती कीमतें इस मुहिम की राह में बड़ी बाधा बन रही है।
जिले में एक बीघा जमीन की कीमत एक से लेकर डेढ़ करोड़ रुपये या इससे अधिक होने के कारण जापान के टोक्यो से लेकर दिल्ली, हरियाणा और अन्य राज्यों के उद्यमियों ने यहां उद्योग लगाने से हाथ खींच लिए हैं। कई उद्यमियों ने जमीन खरीदने की तैयारी भी की, लेकिन कीमत सुनकर प्रस्ताव से पीछे हट गए। अब उद्योग विभाग क्षेत्र के विकास के लिए बड़े उद्यमियों को दोबारा मनाने में जुटे हैं। शामली की भौगोलिक स्थिति उद्योगों के लिए काफी अनुकूल है। यहां से दिल्ली, हरियाणा, पंजाब और देहरादून जैसे प्रमुख शहरों की दूरी कम है। हाईवे के जरिए लोग दो से ढाई घंटे में कई बड़े शहरों तक पहुंच सकते हैं।
जापानी उद्यमी ने महंगी जमीन देख बदला मन
टोक्यो, जापान निवासी एक उद्यमी मोबाइल के पुर्जे बनाने की फैक्टरी शामली में लगाना चाहते थे। इसके लिए उन्होंने स्थानीय उद्यमियों और उद्योग विभाग के अधिकारियों से संपर्क किया। जून में जमीन के लिए बातचीत भी आगे बढ़ी, लेकिन एक बीघा जमीन की कीमत एक से डेढ़ करोड़ रुपये से अधिक बताए जाने के बाद उन्होंने महंगी जमीन का हवाला देते हुए प्रस्ताव से कदम पीछे खींच लिए।
दिल्ली के उद्यमी को चाहिए थी 100 बीघा जमीन
साइमा के अध्यक्ष अंकित गोयल ने बताया कि दिल्ली के सरोजिनी नगर निवासी उद्यमी अनिल मित्तल जुलाई में शामली में प्लास्टिक का बड़ा प्लांट लगाना चाहते थे। इसके लिए करीब 100 बीघा जमीन की जरूरत थी। जमीन की कीमत अधिक होने के कारण उन्होंने फिलहाल उद्योग लगाने से इन्कार कर दिया।
पानीपत के कपड़ा कारोबारी ने भी खींचे हाथ
हरियाणा के पानीपत निवासी कपड़ा कारोबारी सुनील कुमार शामली में कपड़ा उद्योग स्थापित करना चाहते थे। जमीन की कीमत अधिक होने के कारण उन्होंने भी उद्योग स्थापित करने की योजना से कदम पीछे खींच लिए।
एथेनॉल और बायोगैस प्लांट के प्रस्ताव भी अटके
शामली के उद्यमी अमित कुमार समेत कुछ अन्य उद्यमी एथेनॉल और बायोगैस प्लांट लगाने की तैयारी में थे। इन उद्योगों के लिए बड़े भूखंड की जरूरत थी, लेकिन जमीन की कीमत अधिक होने के कारण प्रस्ताव आगे नहीं बढ़ सके।
सात से अधिक बैठकों में उठ चुका मुद्दा
साइमा के अध्यक्ष अंकित गोयल ने बताया कि औद्योगिक क्षेत्रों में जमीन की महंगी कीमत का मुद्दा उद्योग बंधु और व्यापार बंधु की सात से अधिक बैठकों में उठाया जा चुका है। प्रशासन से मांग की जा रही है कि नए उद्योग लगाने वाले उद्यमियों को अधिक से अधिक सब्सिडी और अन्य सुविधाएं दी जाएं, जिससे जमीन की लागत का बोझ कुछ कम हो सके। कहा कि नए उद्योग स्थापित होंगे, निवेश बढ़ेगा और स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के अवसर भी पैदा होंगे।
उद्यमियों को जागरूक कर रहे : उपायुक्त उद्योग
उपायुक्त उद्योग रितिका ने कहा कि कई उद्यमियों ने जमीन की कीमत अधिक होने के कारण उद्योग लगाने से इनकार किया है, वहीं कई नए उद्यमी आगे भी आए हैं। सभी को मोटिवेट किया जा रहा है। प्रयास है कि उपलब्ध योजनाओं और सब्सिडी का लाभ दिलाकर उद्यमियों को जिले में उद्योग लगाने के लिए तैयार किया जाए ताकि शामली औद्योगिक विकास की दिशा में आगे बढ़ सके।
धुरा से अगरबत्ती तक, विदेशों में पहुंच रहे शामली के उत्पाद
शामली के उत्पाद देश ही नहीं, विदेशों तक अपनी पहचान बना रहे हैं। जिले से रिमझिम धुरा, अगरबत्ती, धूपबत्ती और माचिस समेत कई उत्पादों की आपूर्ति देश के विभिन्न हिस्सों के साथ अमेरिका और न्यूजीलैंड तक की जा रही है। बेहतर उत्पादन और निर्यात के लिए जिले के उद्यमियों को कई बार सम्मानित भी किया जा चुका है। जिले में 300 से अधिक औद्योगिक इकाइयां हैं