सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद भी कार्रवाई धीमी, जिले में एक साल से बंद है शेल्टर होम
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संवाद न्यूज एजेंसी
शामली। सुप्रीम कोर्ट ने आवारा कुत्तों की बढ़ती समस्या को गंभीर बताते हुए आठ हफ्तों में समाधान के निर्देश दिए, लेकिन शामली जिले में हालात जस के तस हैं। हर महीने करीब दो हजार लोग कुत्तों के हमलों का शिकार हो रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार, जिला अस्पताल और अन्य स्वास्थ्य केंद्रों में प्रतिमाह 2000 से अधिक लोग एंटी-रैबीज इंजेक्शन लगवाने पहुंचते हैं।
शहर और देहात दोनों जगह कुत्तों का आतंक है। दिल्ली रोड, फव्वारा चौक, रेलपार कॉलोनी, बुढ़ाना रोड से लेकर गांवों तक कुत्ते राहगीरों पर हमला कर रहे हैं। नगर पालिका ने एक साल पहले रेलपार कॉलोनी में कुत्तों की नसबंदी और देखभाल के लिए शेल्टर होम बनाया था, जिसमें करीब 1500 कुत्तों की नसबंदी भी हुई, लेकिन बोर्ड बैठक में विरोध के बाद इसे बंद कर दिया गया। अब चेयरमैन अरविंद सगल का कहना है कि शेल्टर होम का प्रस्ताव फिर से बोर्ड बैठक में रखा जाएगा ताकि जल्द कार्रवाई हो सके।
-मौत के मामले भी सामने आए
कुत्तों के काटने के बाद इलाज में लापरवाही से मौतें भी हो चुकी हैं—
3 जुलाई 2025 : गढ़ीपुख्ता के पेलखा गांव निवासी उत्तराखंड पुलिस के सिपाही दीपक कुमार आर्य की संक्रमण से मौत।
25 जून 2025 : मोहल्ला रायजादगान के चाय विक्रेता राजीव शर्मा की पिटबुल के काटने से मौत।
15 सितंबर 2024: कांधला की 5 वर्षीय रिया की रैबीज से मौत।
यह बोले लोग
राह चलते लोग कुत्तों के हमले का शिकार हो रहे हैं, लेकिन विभागीय अधिकारी ध्यान नहीं दे रहे। -बाबूराम पंवार, दयानंद नगर
सुप्रीम कोर्ट का आदेश सराहनीय है, इससे कुछ राहत जरूर मिलेगी। — संजय गोयल, रेलपार कॉलोनी
इन्होंने कहा
सभी नगर पालिकाओं और पंचायतों को शेल्टर होम बनाने के निर्देश दिए जाएंगे। सरकारी अस्पतालों में एंटी-रैबीज इंजेक्शन उपलब्ध हैं। लोगों को तुरंत वैक्सीन लगवानी चाहिए। -अरविंद कुमार चौहान, जिलाधिकारी