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संसार में रहते हुए भी मन को भगवान के चरणों में रखे : स्वरूपानंद जी

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झिंझाना। सतगुरु देव स्वामी स्वरूपानंद महाराज ने कहा कि संसार में रहते हुए भी प्राणी को अपने मन को परमपिता परमेश्वर के चरणों में रखना चाहिए। संसार में रहकर इंसानियत की मर्यादा कायम करते हुए अपने जीवन को भगवान की कृपा का पात्र बनाना चाहिए।
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धार्मिक भक्त समाज द्वारा नव वर्ष के मौके पर मंदिर ठाकुरद्वारा में शनिवार की देर शाम सत्संग का आयोजन किया गया। भजन कीर्तन के बाद वीतराग ब्रह्मलीन परमहंस स्वामी दयानंद गिरी महाराज के शिष्य स्वामी स्वरूपानंद ने कहा कि सत्संग के कारण ही जीव को पता चलता है कि उसका जन्म क्यों हुआ है। क्या उसके जीवन का लक्ष्य है और वह संसार में रहते हुए भी सत कर्मों को करके किस प्रकार परमपिता परमात्मा के चरणों से जुड़ा रह सकता है। नववर्ष का मतलब है स्वयं के अंदर के गंदे विचारों को बदलना। उन्होंने मौजूद सभी श्रद्धालुओं से आग्रह किया की नव वर्ष के मौके पर वह भी अपने मनों में अच्छे विचारों को स्थान दे और गंदे विचारों को निकाल दें । सत्संग में धार्मिक समाज के नगर अध्यक्ष नीरज मित्तल, आर्य समाज मंदिर के प्रधान अशोक बहादुर गोयल, रविंद्र कुमार संगल (पावटी वाले), डॉ. राकेश कुमार शर्मा, प्रेमचंद वर्मा, डॉ. मधुसूदन , डॉ. अशोक कुमार विश्वास आदि मौजूद रहे।
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