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Shamli News: उद्यमी बोले, बजट अच्छा, जीएसटी के सरलीकरण से मिलेगा लाभ

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शामली। जिले के उद्यमियों ने प्रस्तुत किए गए बजट को अच्छा बताया। साथ ही कहा कि जीएसटी के सरलीकरण से उद्यमियों को लाभ मिलेगा।
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सरकार ने अंतरिम बजट में इनकम टैक्स में कोई राहत नहीं दी है। पुरानी टैक्स रिजीम चुनने पर अभी भी 2.5 लाख रुपये तक का इनकम का ही टैक्स फ्री रहेगा। हालांकि, इनकम टैक्स एक्ट के सेक्सन 87ए के तहत 5 लाख तक की इनकम पर टैक्स बचाया जा सकता है। वहीं, नई टैक्स रिजीम चुनने पर पहले ही तरह ही 3 लाख रुपये तक की इनकम पर टैक्स नहीं देना होगा। इनमें भी इनकम टैक्स एक्ट के सेक्शन 87ए के तहत सैलरीड पर्सन 7.5 लाख तक की इनकम पर और अन्य लोग 7 लाख तक की इनकम पर टैक्स पर छूट पा सकते हैं। बजट पर जिले के उद्यमियों ने कुछ यूं कहा...
साइमा के चेयरमैन और लघु उद्योग भारती के अध्यक्ष अंकित गोयल ने कहा कि बजट लोक लुभावना है।
विशेष कर एमएसएमई सेक्टर में कॉरपोरेट टैक्स 25% से घटकर 22% कर दिया है। साथ ही नई मैन्युफैक्चरिंग यूनिट के लिए 20% तक कर दिया है। वित्त मंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि जीएसटी का सरलीकरण किया जाएगा। इसके अलावा इनकम टैक्स के वर्ष 2009 से पहले 25000 तक के सभी केस वापस होंगे। वर्ष 2022 से पहले ₹10000 तक के सभी केस वापस लिए जाएंगे। कुल मिलाकर सभी वर्गों के लिए बजट बहुत अच्छा है। इससे नई यूनिटों को भी बढ़ावा मिलेगा।
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आईआईए के चेयरमैन आशीष जैन का कहना है कि कोरपोरेट टैक्स घटाकर
उद्यमियों पर पड़ने वाली मार को कम किया गया है, जो उत्साहवर्धक है।बजट उद्योगों को बढ़ावा देने वाला है। टैक्स रिफंड दस दिन के अंदर होगा। इससे उद्यमियों को रिश्वत देनी नहीं पड़ेगी। सरलीकरण भी होगा। बजट से उद्यमियों को काफी फायदा होगा।

-उद्यमी और आईआईए के पूर्व चेयरमैन आलोक जैन का कहना है कि इस बार टैक्स नहीं बढ़ाए गए, यह अच्छा है। टैक्स का जो सिस्टम है, उसे भी आसान कर दिया गया है। इससे उद्यमियों को फायदा होगा। बजट हर वर्ग को लुभाने वाला है।

उद्यमी और आईआईए के संरक्षक अशोक बंसल का कहना है कि बजट सभी को लुभाने वाला रहा। कोरपोरेट टैक्स घटाकर सराहनीय कार्य किया गया है। टैक्स नहीं बढ़ाया गया, इससे उद्यमियों को आर्थिक मार नहीं पड़ेगी।

-7 लाख तक की इनकम पर टैक्स नहीं

सीए डॉ. आकाश गुप्ता के अनुसार अगर किसी की सलाना इनकम 5 लाख रुपये है, पुरानी टैक्स रिजीम में 2.5 लाख रुपये तक की इनकम टैक्स फ्री है। ऐसे में बेचे हुए 2.5 लाख रुपये पर उस व्यक्ति पर 5 प्रतिशत के हिसाब से टैक्स की देनदारी बनेगी। यानी उसे 12500 रुपये टैक्स चुकाना होगा। पर सरकार इस टैक्स को इनकम टैक्स एक्ट के सेक्शन 87ए के तहत माफ कर देती है।

इसमें एक पेंच भी है, अगर कमाई 5 लाख रुपये से एक रुपये भी ज्यादा हुई तो आपको एक रुपये पर नहीं बल्कि ढाई लाख एक रुपये एक पर 5 प्रतिशत के हिसाब से 12500 रुपये की टैक्स की देनदारी बनेगी। वहीं बचे हुए एक रुपये पर 20 प्रतिशत के हिसाब से टैक्स चुकाना होगा। यानी 12501 रुपये टैक्स चुकाना होगा।



-नई टैक्स रिजीम को यूंं समझें
सीए डॉ. आकाश गुप्ता के अनुसार, मान लीजिए अगर किसी की सालाना इनकम 5 लाख रुपये है। नई टैक्स रिजीम में 3 लाख रुपये तक की इनकम टैक्स फ्री है। ऐसे में बचे हुए 2 लाख रुपये पर उस व्यक्ति पर 5% के हिसाब से टैक्स की देनदारी बनेगी। यानी उसे 10,000 रुपये टैक्स चुकाना होगा। मगर इस रिजीम में सरकार 7.5 लाख तक की इनकम पर टैक्स को सेक्शन 87ए के तहत माफ कर देती है।
इसमें भी एक पेंच है, अगर कोई सैलरीड है और उसकी कमाई 7.5 लाख रुपये से एक रुपये भी ज्यादा हुई तो उसको एक रुपये पर नहीं, बल्कि 4,50,001 रुपये पर टैक्स चुकाना होगा। अब 3 लाख रुपये का टैक्स माफ होने के बाद बचे हुए 4,50001 रुपये में से 3 लाख रुपये पर 5% की दर से 15,000 रुपये और बाकी 1,50,001 रुपये पर 10% की दर से 15,000 रुपये चुकाने होंगे।
यानी टैक्स की कुल देनदारी 30,000 रुपये बनेगी, जो लोग सैलरीड नहीं हैं। उन्हें टैक्स डिडक्शन का फायदा 7 लाख रुपये तक की रकम पर ही मिलता है। नए टैक्स सिस्टम में सैलरीड लोगों को 50,000 रुपये का स्टैंडर्ड डिडक्शन का फायदा अलग से मिलता है, इसलिए उनकी 7.5 लाख रुपये तक की इनकम टैक्स फ्री हो जाती है।
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-पुराने विवादों के समाधान की दिशा में एक बड़ा ऐलान

उद्यमी अंकित गोयल के अनुसार, वर्षों से लंबित बकाया प्रत्यक्ष कर मांगों को वापस लेने का फैसला लिया है। कहा कि वर्ष 1962 से जितने पुराने करों से जुड़े विवादित मामले चले आ रहे हैं, उनके वर्ष 2009-10 तक लंबित रहे प्रत्यक्ष कर मांगों से जुड़े 25000 रुपये तक के मामलों को वापिस लिया जाएगा। इसी तरह 2010-11 से 2014-15 के बीच लंबित रहे प्रत्यक्ष कर मांगों से जुड़े 10 हजार रुपये तक के मामलों को वापस लेने का फैसला लिया गया, जो सराहनीय है।

झुलसा रोग की चपेट में आलू की फसल।

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