शामली माजरा रोड पर सुबह सात बजे फैले स्मॉग के दौरान गुजरते वाहन
- फोटो : SHAMLI
सुबह-शाम घूमने न निकले बुजुर्ग, सांस रोगियों को हो सकती है परेशानी
शामली: वातावरण में छाया स्मॉग सेहत पर भारी पड़ सकता है। सांस रोगियों और हृदय रोगियों के लिए प्रदूषण बेहद खतरनाक है। इससे मरीजों की परेशानी बढ़ सकती है। चिकित्सकों का कहना है कि सुबह-शाम घूमने निकलने वाले बुजुर्ग घरों में ही रहें। घर से बाहर निकल रहे हैं तो मास्क लगाकर ही निकलें।
बीते कई दिनों से जिले में प्रदूषण का स्तर बढ़ा हुआ है। सुबह-शाम घना स्मॉग छाया रहता है। दो दिन से सुबह अच्छी धुंध रहती है, लेकिन शाम को थोड़ी राहत है। शनिवार शाम को भी प्रदूषण का स्तर कम रहा। जिले में एक्यूआई 310 के आसपास रहा। वरिष्ठ फिजिशियन डा. खुर्शीद अनवर का कहना है कि स्मॉग सेहत के लिए बेहद खतरनाक है। बुजुर्ग, सांस और हृदय रोगियों को स्मॉग के समय घर से बाहर नहीं निकलना चाहिए। यदि निकल रहे हैं तो मास्क जरूर लगाएं। सुबह-शाम स्मॉग का असर ज्यादा रहता है इसलिए बुजुर्गों को इस समय घर से नहीं निकलना चाहिए।
फसल अवशेष जलने से दिल्ली में सबसे ज्यादा प्रदूषण-
शामली। भारतीय कृषि अनुसंधान पूसा के वरिष्ठ वैज्ञानिक डाक्टर वाईपी सिंह ने बताया कि पंजाब-हरियाणा में ज्यादा फसल अवशेष जलाने से दिल्ली प्रदूषित होता जा रहा है। दिल्ली में दिन में धूप गायब हो जाती है। बादल ही बादल छाए रहते हैं। कृषि गोष्ठी में शामिल होने शामली आए वरिष्ठ वैज्ञानिक ने कहा कि वेस्ट यूपी में पराली और गन्ने की पत्ती जलाने की हरियाणा-पंजाब से कम घटनाएं होती हैं। उन्होंने कहा कि फसल अवशेष जलाने से खेत की मिट्टी के पोषक तत्व जल जाते हैं। खेतों की मिट्टी बीमार हो रही है, जिससे किसानों की फसलों पर यूरिया का ज्यादा खर्च हो रहा है।
ामली माजरा रोड पर सुबह सात बजे फैले स्मॉग के दौरान गुजरते वाहन- फोटो : SHAMLI