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Shamli News: प्यार और सद्भाव का त्योहार है ईद...

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शामली। आज ईद का त्योहार है। जिलेभर में ईद का त्योहार धूमधाम से मनाया जाएगा। यह खुशियों भरा त्योहार है।
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मौलाना शौकीन, मौलाना कासिम बताते हैं कि रमजान माह की समाप्ति और शव्वाल माह की प्रथम तिथि को ईद-उल-फितर मनाई जाती है। ईद शब्द अरबी के ऊद से लिया गया है। ईद का शाब्दिक अर्थ है खुशी और ऊद का अर्थ बार-बार आने वाली। फिर बार-बार लौटकर आने वाले खुशी का यह त्योहार ईद है। ईद का दिन प्रत्येक भारतीय के लिए खुशियों, प्रेम-मोहब्बत, एकता का पैगाम लेकर आता है। यह दिन त्याग, दान, सेवा अपरिग्रह, संयम, समानता की भावना को उजागर करता है। इस दिन विशेष दो रकआत वाजिब ईद-उल-फितर के रूप में अदा की जाती हैं।




कब मनाई गई पहली ईद

मौलाना साजिद के अनुसार इस्लाम में माना जाता है कि पहली ईद हजरत मुहम्मद पैगंबर ने सन 624 ईस्वी में जंग-ए-बदर के बाद मनाई थी।

-जानिए.. जकात क्या है

किसी भी व्यक्ति की आमदनी का 2.5 फीसदी हिस्सा किसी गरीब या जरूरतमंद को दिया जाता है, जिसे जकात कहते हैं। यानी अगर किसी मुसलमान के पास तमाम खर्च करने के बाद 100 रुपये बचते हैं तो उसमें से 2.5 रुपये किसी गरीब को देना जरूरी होता है।
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-जानिए... फितरा क्या है
फितरा वो रकम होती है जो खाते-पीते, साधन संपन्न घरानों के लोग आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को देते हैं। ईद की नमाज से पहले इसका अदा करना जरूरी होता है। फितरे की रकम भी गरीबों, बेवाओं व यतीमों और सभी जरूरतमंदों को दी जाती है। इस बार फितरे के रूप में 55 रुपये तय किए गए हैं। लोगों को 55 रुपये के हिसाब से प्रत्येक सदस्य का फितरा देना होगा। हर व्यक्ति को फितरे के रूप में एक किलो 633 ग्राम गेंहू या इसके बाजार भाव के लिहाज से राशि देना होगी।
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