शामली। जीएसटी (वस्तु एवं सेवा कर) लागू होने के बाद टैक्स चोरी रोकने के लिए ई-वे बिल व्यवस्था बुधवार से लागू हो जाएगी। इसके लिए वाणिज्यकर विभाग ने तैयारियां पूरी कर ली हैं। उधर, ई-वे बिल लागू करने को लेकर व्यापारियों में विरोध मुखर हो रहा है। व्यापारियों का कहना है कि ई-वे बिल व्यवस्था से इंस्पेक्टर राज को बढ़ावा मिलेगा।
केंद्र सरकार ने एक जुलाई से जीएसटी लागू किया। इसके बाद 26 जुलाई से ही ई-वे बिल व्यवस्था लागू की जानी है। इसके तहत किसी भी व्यापारी को सामान की खरीद पर ई-वे बिल जारी करना अनिवार्य होगा। ई-वे बिल ऑनलाइन ही जारी होगा। इसे लेकर व्यापारियों के सामने उलझन हो गई है।
पूर्व में भी वाणिज्यकर विभाग में रजिस्टर्ड व्यापारियों को सामान की खरीद तथा दूसरे राज्य से माल मंगाने और भेजने पर फार्म 38 और फार्म 21 भरना होता था, लेकिन अब यह व्यवस्था पूरी तरह ऑनलाइन हो जाएगी। इसमें किसी भी स्तर से टैक्स चोरी होने की संभावना खत्म हो जाएगी।
उधर, ई -वे बिल व्यवस्था को लेकर मंगलवार को कैराना रोड पर एक सभागार में व्यापारियों तथा उद्यमियों की वाणिज्यकर विभाग के अधिकारियों के साथ बैठक हुई। इसमें व्यापारियों ने कहा कि ई-संचरण बिल लागू करने का कोई औचित्य नहीं है। यह प्रदेश में अधिकारियों की मनमानी है।
इस कानून को खत्म किया जाना चाहिए, क्योंकि इससे भ्रष्टाचार को बढ़ावा मिलेगा। व्यापारियों ने स्पष्ट कहा कि ई-संचरण बिल व्यवस्था से व्यापार करना मुश्किल हो जाएगा, जिससे रोजी रोटी का संकट पैदा होगा। वाणिज्यकर विभाग के डिप्टी कमिश्नर एके दोहरे ने उन्हें समझाया कि ई-संचरण बिल व्यवस्था तो लागू होगी।
इस दौरान आईआईए के चेयरमैन वेदप्रकाश आर्य, नरेंद्र अग्रवाल, आलोक जैन, मोहित जैन, भारत मित्तल, रुचिर गोयल, राधेश्याम जांगिड, निखिल ऐरन, शामली इंडस्ट्रियल एस्टेट एसोसिएशन के अध्यक्ष प्रवीण गोयल, महासचिव अंकित गोयल, अधिवक्ता सुरेश चंद अग्रवाल, विपुल जैन, रोहित गर्ग, अनिल गोयल आदि मौजूद रहे।
उधर, पश्चिमी उत्तर प्रदेश संयुक्त उद्योग व्यापार मंडल की बैठक में भी ई-वे बिल का विरोध किया गया। प्रदेश अध्यक्ष घनश्यामदास गर्ग ने कहा कि इस कानून से व्यापारियों का उत्पीड़न बढ़ेगा।
जब केंद्र सरकार ने ई-वे बिल स्थगित कर दिया था, तो फिर राज्य स्तर पर इसे लागू क्यों नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि व्यापारी संगठन ई-वे बिल लागू होने से रोकने के लिए प्रत्येक जिले में जीएसटी उपायुक्त को ज्ञापन देंगे। सूर्यवीर सिंह, नरेंद्र अग्रवाल, आशु पुरी, सुखपाल जांगिड, अमित जैन, मनोज मित्तल, पवन गोयल, प्रदीप विश्वकर्मा आदि मौजूद रहे।
ऐसी होगी ई वे बिल व्यवस्था
ई-वे बिल 1 - प्रदेश के बाहर से पांच हजार रुपये अथवा उससे अधिक के माल की खरीद करने पर यह फार्म भरना अनिवार्य होगा। पूर्व में इसके लिए फार्म 38/ ई-संचरण भरा जाता था।
ई-वे बिल 2 - प्रदेश के भीतर अथवा बाहर से एक लाख रुपये तथा उससे अधिक मूल्य के मेन्था आयल, मेन्थाल एवं डीएमओ, सुपारी, लोहा तथा इस्पात, सभी प्रकार के खाद्य तेल और वनस्पति घी का परिवहन किए जाने पर यह फार्म भरना होगा। पूर्व में इसके लिए फार्म 21 भरना होता था।
ई-वे बिल 3 - ई कॉमर्स ऑपरेटर्स अथवा अधिकृत कोरियर पर यह व्यवस्था लागू होगी। पूर्व में इस पर फार्म 38(ई-संचरण) लागू था।
टीडीएफ 1 - उत्तर प्रदेश के बाहर किसी स्थान से राज्य के बाहर किसी स्थान पर पांच हजार रुपये या उससे अधिक मूल्य के कराधेय के माल का परिवहन करने पर तथा राज्य के अंदर प्रवेश होने पर यह फार्म भरना होगा। पूर्व में बहती से यह कार्य हो जाता था।
टीडीएफ 2 - राज्य से माल की निकासी करने पर यह फार्म भरना होगा। पूर्व में इसके लिए बहती खारिज करानी होती थी।