शामली। रोडवेज बसों में सफर करने वाले मूक-बधिर यात्रियों को अब परेशानी का सामना नहीं करना पड़ेगा। परिवहन निगम ने परिचालकों को सांकेतिक भाषा का प्रशिक्षण देने का फैसला किया है। इसके बाद कंडक्टर न केवल मूक-बधिर यात्रियों की समस्याओं को आसानी से समझ पाएंगे, बल्कि उन्हें दिव्यांगों के लिए आरक्षित सीट पर बिठाकर सम्मानजनक व्यवहार भी करेंगे।
निगम की ओर से जारी आदेश के मुताबिक यह प्रशिक्षण मंडल स्तरीय कार्यालयों पर 28 सितंबर से 15 अक्तूबर तक कराया जाएगा। प्रशिक्षण अंतरराष्ट्रीय बधिर संस्था के विशेषज्ञों द्वारा दिया जाएगा। इसमें परिचालकों को सांकेतिक भाषा के मूलभूत शब्द और संकेत सिखाए जाएंगे, ताकि वे मूक-बधिर यात्रियों की जरूरतें समझकर उन्हें बेहतर सुविधा दे सकें।
अक्सर देखा गया है कि मूक-बधिर यात्रियों को अपनी बात समझाने में परेशानी होती थी। कई बार परिचालक उनकी भाषा न समझ पाने के कारण उन्हें बस से उतार भी देते थे लेकिन प्रशिक्षण के बाद कंडक्टर न केवल उनकी समस्या का समाधान करेंगे, बल्कि नरम और सहयोगी व्यवहार के साथ मददगार भी बनेंगे।
शामली रोडवेज बस स्टैंड प्रभारी राजेंद्र चौहान ने बताया कि परिचालकों के प्रशिक्षण की तारीखें जल्द तय कर दी जाएंगी। सभी कंडक्टरों को निर्देश दिए गए हैं कि बसों में यात्रा करने वाले बुजुर्गों, मूक-बधिरों और अन्य दिव्यांग यात्रियों का विशेष ध्यान रखें। यदि किसी यात्री को परेशानी होती है तो उसकी शिकायत लिखित में ली जाएगी और गठित टीम उसकी निगरानी करेगी। अधिकारियों का कहना है कि प्रयास यही रहेगा कि किसी भी दिव्यांग या मूक-बधिर यात्री को सफर के दौरान असुविधा न होने पाए और वे सम्मान के साथ यात्रा कर सकें।