कैराना। मोहर्रम की पांचवीं तारीख को अलम जुलजनाह का मातमी जलूस निकाला गया, जिसमें शिया सोगवारों ने हजरत इमाम हुसैन व उनके परिवार के 72 शहीदों को याद करते हुए सीनाजनी की।
जुलूस दोपहर तीन बजे मोहल्ला आलकला स्थित अजाखाना नादिर खां से निकाला गया, जिसमें कौसर जैदी, अली हैदर जैदी, वसी साकी, चांद मिया, इशरत हुसैन, नौनिहाल जैदी आदि ने नोहाख्वानी की। मातमी जुलूस से पूर्व अमेरिका से तशरीफ लाए मौलाना तहजीबुल हसन आजमी ने करबला पर मजलिस में खिताब करते हुए कहा कि करबला की जंग जुल्म के खिलाफ मजलूमियत की जंग है जिसमें सच्चाई की राह पर चलते हुए मजलूमों की विजय हुई। यह असत्य पर सत्य कर जीत है। जो कयामत तक करबला के रूप में जिंदा रहेगी।
एक और मजलिस में खिताब करते हुए ईरान से आए मौलाना मेहंदी हसन ने कहा कि अब वक्त आ गया कि सांप्रदायिकता के विरुद्ध सभी शांतिप्रिय अवाम एक होकर मुल्क की खुशहाली और तरक्की के लिए काम करें।
मौलाना सैयद अजादर हुसैन सैथल बरेली ने मजलिस को खिताब करते हुए कहा कि एक तरफ गरूर और तकब्बुर के साथ हजारों की फौज और एक तरफ सच्चाई पर चलने वाले 72 निहत्थे जांबाज। जुलूस शामली रोड स्थित पब्लिक इंटर कालेज के मिडिल भवन (करबला) के प्रांगण में समाप्त हुआ।
सैयद मो. मेहंदी, सैयद यावर अली, सैयद रजब अली, सदाकत हुसैन, सैयद शबी हैदर, सैयद वसी हैदर साकी, शाह रजा जैदी, जावेद रजा जैदी आदि मौजूद रहे।