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दो स्कूलों में एक टीचर, क्या होगा फ्यूचर

Sat, 03 Dec 2016 11:43 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
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प्राइमरी स्कूल में बर्तन धोते बच्चे। - फोटो : अमर उजाला
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शामली के थानाभवन में सरकारी स्कूलों में प्रारंभिक शिक्षा के सुधारने के दावे तो किए जाते हैं, लेकिन विद्यालयों में स्थिति इसके विपरीत है। फर्नीचर या तो है नहीं, है तो टूटा है। अध्यापक पढ़ाई के प्रति गंभीर नहीं हैं। विद्यालयों में बच्चे हैं तो अध्यापक नहीं और अध्यापक हैं तो बच्चें नहीं हैं। शौचालयों के दरवाजे टूटे हैं। मिड डे मिल का भोजन बच्चों को धरती पर बैठाकर खिलाया जा रहा है। 
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कई स्कूलों में भोजन बनता ही नहीं। बच्चे खेलने में मस्त रहते हैं, तो अध्यापक धूप का आनंद ले रहे हैं। सरकार की ओर से बच्चों को यूनिफार्म वितरित कराई गई, मगर अधिकांश बच्चे बगैर यूनिफार्म के ही विद्यालय आते हैं। अमर उजाला टीम ने शनिवार को क्षेत्र के गांव मुल्लापुर, तितारसी, लतीफगढ़, मसावी और भैंसानी ईस्लामपुर के स्कूलों की स्थिति देखी, तो वहां यही तथ्य सामने आए। 

पूर्व माध्यमिक विद्यालय मुल्लापुर ः विद्यालय की नई बिल्डिंग बनी हुई है। विद्यालय में मात्र चार लड़कियां पढ़ती हैं। यहां एक अध्यापिका सोनम रूहेला नियुक्त हैं। विद्यालय में कोई सफाई कर्मी नहीं है। बालिका व अध्यापिका ही स्वयं सफाई करते हैं। यहां फर्नीचर तो है लेकिन बच्चे नहीं हैं। रसोई माता प्राथमिक विद्यालय से भोजन बनाकर पूर्व माध्यमिक विद्यालय में लाती है। अध्यापिका सोनम रूहेला का कहना है गांव वालों से बार बार संपर्क किया, लेकिन एडमिशन नहीं हो रहे हैं। 
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प्राथमिक विद्यालय एवं पूर्व माध्यमिक विद्यालय मसावी 
एक ही परिसर में बने दोनों विद्यालयों का गेट एक ही गेट है। गेट पर गंदगी फैली रहती है। नाली टूटी हुई है। बच्चों को मध्याह्न भोजन धरती पर बैठाकर खिलाया जाता है। कोई सफाई कर्मचारी नहीं है। यहां लड़कियों को यूनिफार्म वितरित कर दी गई, लड़कों को नहीं मिली। लड़कियां आधे से ज्यादा बिना यूनिफार्म में थी। यहां छह अध्यापक नियुक्त हैं सभी       उपस्थिति मिले। इसके बावजूद   बच्चे खेलने में मस्त थे। वहीं, कुछ बच्चे मध्याह्न भोजन कर बर्तन भी साफ करते मिले। 
प्राइमरी पाठशाला भैंसानी इस्लामपुर ः विद्यालय में 112 बच्चों का दाखिला है, लेकिन शनिवार को महज 25 बच्चे ही पहुंचे। वह भी खेलने में मस्त थे। अध्यापक धूप का आनंद ले रहे थे। विद्यालय में मध्याह्न भोजन नहीं बना था। प्रधानाध्यापक खाना खा रहे थे। रख रखाव के अभाव में फर्नीचर टूटा था, बच्चे भी बिना यूनिफार्म के विद्यालय में आए थे। यहां तीन अध्यापकों की नियुक्ति है, जिनमें से एक शनिवार को अवकाश पर थे।
प्राथमिक विद्यालय ग्राम लतीफगढ़ ः विद्यालय में 105 बच्चों का दाखिला है, जिनमें से आधे ही बच्चें शनिवार को विद्यालय में पहुंचे। विद्यालय में बने दोनों शौचालय खराब हैं, जिसमें एक को अध्यापिका ने ही ठीक कराया था। स्कूल की चारदीवारी कई जगह से टूटी हुई है। विद्यालय में खाली पड़ी जगह में बड़े बड़े गड्ढे बने हुए हैं। जहां बरसात में पानी भर जाता है। तीन अध्यापक नियुक्त हैं। 
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