संवाद न्यूज एजेंसी
शामली। जिला अस्पताल में डायलिसिस मशीन पिछले महीने से खराब चल रही हैं। सिर्फ दो मशीनों पर ही एक दिन में सिर्फ आठ मरीजों की ही डायलिसिस हो रही है। अन्य मरीजों को प्राइवेट में महंगा शुल्क देकर डायलिसिस कराने को मजबूर होना पड़ रहा है।
जिला अस्पताल में चार साल पहले पीपीपी मोड पर डायलिसिस यूनिट चालू हुई थी। यहां मरीजों को डायलिसिस की निशुल्क सुविधा उपलब्ध है। शुरुआत में दो मशीनों पर डायलिसिस की सुविधा शुरू की गई थी, लेकिन मरीजों की संख्या देखते हुए बाद में डायलिसिस मशीनों को बढ़ाकर पांच किया गया।
इनमें दो मशीनें हेपेटाइटिस पॉजिटिव मरीजों के लिए और तीन मशीनें सामान्य मरीजों के लिए अलग-अलग कक्ष में लगाई गई हैं। पिछले महीने 28 जुलाई को एक मशीन तकनीकी खराबी के कारण बंद हो गई।
तीन दिन बाद 31 जुलाई को दूसरी मशीन खराब हुई। चार अगस्त को हेपेटाइटिस पॉजिटिव मरीजों की डायलिसिस मशीन खराब हो गई। यह मशीन पिछले महीने ही नई आई थी। सभी मशीनें चलने से एक दिन में 12 से 15 मरीजों की डायलिसिस हो रही थी। अब दो मशीनों पर आठ मरीजों की ही डायलिसिस हो पा रही हैं।
अन्य मरीजों को बागपत अस्पताल जाने की सलाह दी जा रही है, लेकिन अधिकतर मरीज वहां न जाकर प्राइवेट में महंगा शुल्क देकर डायलिसिस कराने को मजबूर हो रहे हैं।
डायलिसिस यूनिट की इंचार्ज मधु शर्मा ने बताया कि कंपनी को मशीनों के खराब होने की जानकारी भेजी हुई है। एक-दो दिन में इंजीनियर के आने के उम्मीद हैं। दो मशीनों पर सुबह छह बजे से रात 10 बजे तक 16 घंटे दोनों मशीनों पर डायलिसिस किया जा रहा है।