फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

छोटी दिवाली के साथ आज भी धनतेरस का संयोग

विज्ञापन
शामली दीपावली व धनतेरस पर फ्रीज व कपडे धाने की मशीन की खरिदरी करते लोग - फोटो : SHAMLI
विज्ञापन
छोटी दिवाली के साथ आज भी धनतेरस का संयोग
विज्ञापन

शामली। आज धनतेरस और छोटी दिवाली एक साथ मनाई जाएगी। कार्तिक मास की कृष्ण पक्ष त्रयोदशी को धनतेरस का त्योहार मनाया जाता है।
पंडित प्रभु शंकर शास्त्री, पंडित कुशलानंद जोशी के मुताबिक पौराणिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन मां लक्ष्मी, भगवान विष्णु, यक्षराज कुबेर और यमराज का पूजन भगवान धनवंतरी के पूजन का भी विशेष महत्व है। भगवान धनवंतरी आयुर्वेद के अधिपति देवता है। इनकी आराधना से समस्त व्याधियों का नाश होता है। भगवान धनवंतरी विष्णु के अंशावतार है। इन्हें पीतल धातु अत्यंत प्रिय होने से वस्तु के खरीदने से लाभ होता है। जैन धर्म में इसे धन्य तेरस या ध्यान तेरस कहा जाता है। इसी दिन तीर्थंकर भगवान महावीर ध्यानावस्था में गये थे। जिसके तीन दिन बाद यानी कि दिवाली वाले दिन उन्हें कैवल्य की प्राप्ति हुई थी।
धनतेरस पूजन मुहूर्त एवं तिथि धनतेरस तिथि प्रारंभ
धनतेरस तिथि की समाप्ति : 13 नवंबर गोधूलि बेला में 05:59 मिनट तक
धनतेरस पूजन का समय : 05:28 बजे से लेकर 05:59 के बीच
प्रदोष काल सांय : 05:25 से रात्रि 08:06 बजे तक
वृषभ काल सांय : 05:33 से रात्रि 07:29 बजे तक
धनतेरस पूजन सामग्री
लक्ष्मी-गणेश की छवि वाले चांदी के सिक्के, पूजा के लिए पांच ताम्बुल, 21 कमलगट्टे चढ़ाने के लिए, भोग लगाने के लिए पीली और सफेद मिठाई, दोष रहित पान के पत्ते, लौंग, कपूर, रोली, अक्षत, पुष्प, गंध, माला, शरीफा फल, श्रीफल, गंगा जल, गंगा जल, धूप, चंदन, हल्दी, शहद, दूर्वा इत्यादि।
विज्ञापन

धनतेरस पूजन विधि
गोधूलि बेला में काष्ठ आसन पर पीतांबरी बिछाकर भगवान धनवंतरी, मां लक्ष्मी और यक्षराज कुबेर की छवि या प्रतिमा स्थापित करे। इसके बाद पूजन स्थल को गंगाजल से पवित्र करें। नवग्रह, दिग्पालों, ग्राम देवता, कुलदेवता और इष्ट का आह्वान करते हुए पूजन शुरू करें। गोत्र का मन में स्मरण कर दीप करें। चंदन से तिलक करें। तत्पश्चात 21 या 108 बार ॐ ह्रीं कुबेराय नम: का जाप करें। धनवंतरी स्तोत्र का वाचन करें। भगवान धनवंतरी को पीले रंग की मिठाई और यक्षराज कुबेर को सफेद मिठाई का भोग लगाए। मां लक्ष्मी और गणेश का पूजन करें। मां लक्ष्मी को संपूर्ण शृंगार और कमलगट्टे अर्पित करें। दूर्वा चढ़ाते हुए गजानन को प्रसन्न करें। पूजन के अंत सभी से किसी प्रकार की त्रुटि के लिए क्षमा मांगकर पूजा को समापन की ओर ले जाये। दक्षिण दिशा में भगवान यम का स्मरण करते हुए दीये को रखा जाता है।
विज्ञापन

छोटी दीपावली और नरक चतुर्दशी
नरक चतुर्दशी को रूप चौदस, काली चौदस शिव चतुर्दशी और छोटी दीपावली भी कहते हैं। इसे साल में एक बार आने वाला शुभ अवसर माना जाता है। इस दिन छह देवों की पूजा करने का विधान है। यम पूजा, काली पूजा, कृष्ण पूजा, शिव पूजा, हनुमान पूजा और वामन पूजा का विधान है।
दिवाली पूजन मुहूर्त
- शनिवार, 14 नवंबर 2020 को दिवाली। गृहस्थ और व्यापारी वर्ग के लिए पूजा का शुभ मुहूर्त
दीपावली पूजन शुभ मुहूर्त शनिवार, 14 नवंबर 2020
लक्ष्मी पूजा मुहूर्त : शाम 5.28 बजे से 7.23 बजे तक।
प्रदोष काल : शाम 5.33 बजे से 8.12 बजे तक।
वृषभ काल : शाम 5.28 बजे से 7.24 बजे तक।
लक्ष्मी पूजा चौघड़िया
14 नवंबर 2020 शुभ पूजा मुहूर्त
दोपहर : 2.17 बजे से शाम 4.07 बजे तक।
शाम : 5.28 से 7.07 बजे तक।
रात्रि : 8.47 से 1.45 बजे तक।

शामली दीपावली व धनतेरस पर बर्तनो की खरिदारी करती महिलाएं- फोटो : SHAMLI

विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें