शामली। मेरठ-करनाल हाईवे से नवीन जिला मुख्यालय जाने वाली पूर्वी यमुना नहर की पटरी के चौड़ीकरण के लिए वन विभाग लखनऊ ने आठ हेक्टेयर अलग-अलग स्थानों पर आवंटित करने पर आपत्ति लगाई है। आवंटित भूमि एक स्थान पर दिए जाने के बाद पेड़ कटान का रास्ता साफ होगा। आपत्ति को लोक निर्माण विभाग प्रांतीय खंड शामली की ओर से डीएम अरविंद कुमार चौहान के समक्ष पेश कर दिया है।
डीएम के निर्देश पर लोक निर्माण विभाग प्रांतीय खंड शामली की ओर से मेरठ-करनाल हाईवे से लेकर भैंसवाल नवीन जिला मुख्यालय तक आठ किमी लंबी नहर की पटरी के चौड़ीकरण के लिए 20 करोड़ का एस्टीमेट बनाकर शासन को भेजा गया था। शासन से धनराशि स्वीकृत हो चुकी है। वन विभाग की ओर से पेड़ कटान की अनुमति न आने से पूर्वी यमुना नहर की पटरी का चौड़ीकरण का कार्य अधर में लटका हुआ है। वन विभाग को लोक निर्माण विभाग आठ हेक्टेयर भूमि कैराना, शामली व ऊन तहसील में आवंटित कर चुका है। भूमि का सत्यापन वन विभाग के अफसर कर चुके हैं लेकिन लखनऊ वन विभाग की ओर से आठ हेक्टेयर भूमि कैराना-शामली व ऊन तहसील में आवंटित किए जाने पर आपत्ति लगाई गई है।
लोक निर्माण विभाग के अधिशासी अभियंता राजकुमार सिंह ने बताया कि वन विभाग ने आठ हेक्टेयर भूमि एक ही स्थान पर आवंटित करने के निर्देश दिए हैं। आठ हेक्टेयर भूमि जिला प्रशासन से विचार-विमर्श के बाद एक स्थान पर आवंटित करने के बारे में तय किया जाएगा। एक ही स्थान पर भूमि दिए जाने के बाद वन विभाग से पेड़ कटान की अनुमति होगी। इसके बाद नहर पटरी के चौड़ीकरण का रास्ता साफ होगा।