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शामली: 100 परिवार के सिर पर मंडरा रहा मौत का साया

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- बिल्डिंग की दीवारों में आ रही है दरारें, उतरने लगा है सीमेंट, दरवाजे भी गले
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- 15 साल में आज तक नहीं हुई मरम्मत, डिमांड भेजी, लेकिन स्वीकृत नहीं हुआ बजट
- बनत कस्बे में गरीबों के लिए बनाए गए थे बसपा सरकार में कांशीराम आवास
दीपक गुप्ता
शामली। बसपा सरकार में गरीबों के लिए बनाए गए आशियाने की मरम्मत करने की जिम्मेदारी किसी भी सरकार ने नहीं ली। इन आवासों की हालत बद से बदतर हो चुकी है। इन जर्जर आवासों पर गिरने का खतरा मंडरा रहा है। करीब 100 परिवार डर के साए में रह रहे हैं। डूडा ने मरम्मत के लिए बजट की डिमांड की थी, लेकिन नहीं मिला।
15 वर्ष पहले बसपा सरकार ने गरीबों को आवास देने के लिए कांशीराम आवास योजना चलाई थी। योजना के तहत डेढ़ सौ से अधिक आवास बनत कस्बे में बनाए गए थे। आवास का निर्माण पूर्ण होने के बाद दस वर्ष पहले डूडा विभाग ने गरीबों को आवास आवंटित कर दिए थे। सौ के करीब परिवारों को आवास का आवंटन किया। आवास की मरम्मत का जिम्मा भी डूडा विभाग को दिया गया था। इसके लिए शासन से बजट आता है, लेकिन बजट के अभाव में यह आवास काफी जर्जर हो चुके हैं। आवासों की दीवारों में दरारें आ गई हैं। सीमेंट भी उखड़ना शुरू हो गया है। दरवाजे व खिड़की भी गल चुके हैं। यहां रहने वाले परिवार सर्दी में कपड़ा टांगकर ठंड से बचने का प्रयास करते हैं। जर्जर आवासों को मरम्मत के लिए न तो प्रशासन ने और न ही सरकार व उनके प्रतिनिधियों ने ध्यान दिया। संवाद
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बारात घर भी हुआ खंडहर
कांशीराम योजना के तहत शादी-विवाह कराने के लिए बारात घर भी बनाया गया था। यह भी खंडहर में तब्दील हो चुका है। वहां से खिड़की व दरवाजे तक चोरी हो चुके हैं। उसमें नशेड़ियों व जुआरियों का जमावड़ा लगा रहता है। इसके कारण कॉलोनी के लोगों को भी काफी दिक्कत का सामना करना पड़ता है। उसकी दीवारें व छत कभी भी गिर सकती है।
50 से अधिक आवास पड़े खाली
एक दशक बाद भी 50 से अधिक आवास भी खाली पड़े हैं। इनका आवंटन पात्रों को नहीं किया गया। इसमें डूडा के अधिकारियों की लापरवाही साफ झलकती है। ये आवास बिना किसी के काम आए जर्जर हो गए।

गरीबी के कारण यहां रहना मजबूरी
रूखसाना ने कहा कि गरीब है इसलिए जर्जर आवासों में रहने पड़ रहा है। यहां के अधिकारी इनकी मरम्मत कराने की तरफ ध्यान तक नहीं दे रहे है। इससे उनको काफी परेशानी उठानी पड़ रही है। मरम्मत के लिए अधिकारियों से शिकायत की, लेकिन ध्यान नहीं दिया गया।

11 साल में बिजली व पानी नहीं दिया
जरीना ने कहा कि वह 11 साल से कांशीराम आवास में रह रहे है और आज तक भी बिजली का कनेक्शन तक नहीं दिया। यहां पानी तक नहीं आता है। हैंडपंप से पानी भरकर बाल्टी से तीसरी मंजिल पर रस्सी से खींचते हैं।

जब नहीं देनी सुविधा तो क्यों बनवाए आवास
मकसूद का कहना है कि जब सरकार को कांशीराम आवास में सुविधा तक नहीं देनी थी तो क्यों इनको बनवाया गया। गरीबों के सिर पर हर समय मौत का साया मंडराता रहता है और वह डर के साये में इन आवास में रहते है।

सरकार नहीं दे रही ध्यान
गुलजार ने बताया कि सरकार ने कांशीराम आवास तो बना दिए, लेकिन इनकी मरम्मत तक नहीं कराई गई। यदि उनके पास पैसे होते तो वह अपने मकान में रहते। इन जर्जर आवास में रहना उनकी मजबूरी है।
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वर्जन............
कांशीराम आवास की बिल्डिंग की मरम्मत के लिए शासन को बजट की डिमांड भेजी थी, लेकिन बजट नहीं आया। बजट आते ही बारात घर व बिल्डिंग की मरम्मत कराई जाएगी। वह एक बार फिर बजट के लिए शासन को पत्र लिखेंगे।-प्रदीप कांत, परियोजना अधिकारी डूडा।
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