शामली/चौसाना। यमुना किनारे के गांवों में किसानों की जान और फसलें अभी भी खतरे में हैं। हथिनीकुंड बैराज से रविवार को दोपहर छोड़ा गया 25 हजार क्यूसेक पानी का जिले में आज से असर शुरू हो गया है। जिले के शीतलगढ़ी गांव में यमुना की कटान शुरू हो गई है। ग्रामीण कटान रोकने के लिए पेड़ों को काटकर डाल रहे हैं। साल्हापुर गांव में कटान रोकने के लिए बनाया मचान आज ध्वस्त हो गया है।
यमुना के जलस्तर में गिरावट आने के बाद जिले के किनारे के गांवों के किसानों की जान जोखिम में है। फसलों पर अभी तक खतरा मंडरा रहा है। सोमवार को सुबह जलस्तर बढ़ने से यमुना किनारे शीतल गढ़ी गांव में कटान शुरू हो गया। शीतल गढ़ी गांव में राकेश, नकली की 38 बीघा गन्ना, वीर सिंह का 11 बीघा धान, करण सिंह का 11 बीघा गन्ने की फसल पूरी तरह डूब गई है।
साल्हापुुर गांव में ड्रेनेज खंड द्वारा सोमवार को कटान रोकने के लिए बनाया गया मचान तेज बहाव में ध्वस्त हो गया है। ड्रेनेज खंड के सहायक अभियंता यासीन खां ने बताया कि शीतलगढ़ी में यमुना द्वारा कटान होने की सूचना पर मजदूर भेज दिए गए है। मंगलवार को कटान रोकने के लिए ड्रेनेज खंड द्वारा शीतलगढ़ी में कार्य शुरू कर दिया जाएगा। कैराना यमुना पुल केंद्रीय जल आयोग के पर्यवेक्षकों का मानना है कि सोमवार की शाम पांच बजे तक यमुना का जलस्तर 229.35 मीटर है। देर रात्रि तक जलस्तर बढ़ने की संभावना है।