शामली। बेटा वह होता है जो कि संपत्ति के बंटवारे पर अधिक ध्यान देता है। जबकि सुपुत्र वह होता है जो माता-पिता की सेवा कर अपने कुल की मर्यादा का मान रखता है। यह बात विश्व हिंदू महासंघ के तत्वावधान में आयोजित समरसता सप्ताह के तहत महामंडलेश्वर सत्यानंद गिरी ने कही।
कैराना रोड स्थित एक होटल में आयोजित कार्यक्रम में मुख्य अतिथि महामंडलेश्वर सत्यानंद गिरी व साध्वी सविता देवी जमुना दास रहे। महामंडलेश्वर ने कहा कि हमें अपने धर्म से जुड़कर जातिवाद की कुप्रथा से छुटकारा पाना होगा। अपने धर्म और संस्कृति के प्रति अटूट श्रद्धा रखनी होगी। जिसकी बदौलत हम एक वक्त विश्व गुरु थे। फिर से विश्व गुरु बनने के लिए हमें अपनी संस्कृति और सभ्यता को अपनाना होगा। साध्वी ने कहा कि जाति बिरादरी को भूलकर हम सिर्फ और सिर्फ हिंदू हैं, इसी बात पर ध्यान दें तो किसी की हिम्मत नहीं कि हमारे धर्म ग्रंथों का अपमान कर सके।
कार्यक्रम संयोजक मंडल प्रभारी पंकज वालिया ने आह्वान किया कि सभी अपनी संस्कृति का अनुसरण करते हुए जाति बिरादरी रूपी जहर को अपने अंदर से बाहर कर दें। महिलाओं ने महामंडलेश्वर और साध्वी काे प्रतीक चिन्ह देकर, भगवा वस्त्र और रुद्राक्ष की माला पहनाकर स्वागत किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता मनोज सैनी ने की। मेरठ मंडल प्रभारी नरेश उर्फ बिल्लू प्रधान, रवि दयाल, दीपक कुमार प्रजापति, जिला प्रभारी राजेश चौहान, रविंद्र कालखंडे, बिट्टू कुमार, अरविंद कौशिक, मनीष नामदेव, शशिकांत सिरोहा, सुधीर शास्त्री, गोरक्ष प्रकोष्ठ जिलाध्यक्ष रामकुमार उर्फ आशु सैनी, मुज्जफरनगर जिला प्रभारी बिट्टू चौधरी, मोहित गुप्ता, सीमा गर्ग, नीतू सिंह, सीमा शर्मा, ममता रेखा, शशि अरोरा, संगीता जिंदल, महिमा वालिया, सचिन सैनी आदि मौजूद रहे।