- सीएचसी शामली में लगभग 1300 से ज्यादा मरीज पहुंचे
- नजला, जुकाम, खांसी व वायरल बुखार के मरीज रहे ज्यादा
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संवाद न्यूज एजेंसी
शामली। होली की छुट्टी के बाद पूरे समय के लिए खुली सीएचसी शामली में शुक्रवार को मरीजों की भीड़ लगी रही। होली से पहले आने वाले मरीजों के मुकाबले लगभग दोगुने 1300 मरीज उपचार कराने पहुंचे। अधिकतर मरीज नजला, जुकाम, खांसी और वायरल बुखार के रहे।
मंगलवार को होलिका दहन, बुधवार को दुल्हैंडी होने के कारण सरकारी अस्पतालों में अवकाश रहा। इन दोनों दिन इमरजेंसी में मरीजों को उपचार दिया गया। बृहस्पतिवार को आधे दिन पूर्वाह्न 11 बजे तक अस्पताल खुले। तीन दिन बाद शुक्रवार को पूरे समय दोपहर दो बजे तक अस्पताल खुले। सीएचसी शामली में सुबह से ही मरीजों की भीड़ लगनी शुरू हो गई थी। दोपहर दो बजे तक भी मरीजों की लाइन लगी रही। अधिकतर मरीज नजला, जुकाम, खांसी और वायरल बुखार के आए। हड्डी संबंधी रोगों के करीब 110 मरीज आए। होली से पहले सीएचसी पर करीब 700 मरीज आ रहे थे। हाेली के बाद शुक्रवार को एक हजार नए मरीज आए जबकि करीब 300 से अधिक मरीज पुरानी पर्ची लेकर आए थे। दोपहर दो बजे तक मरीजों की लाइन लगी रही।
सीएचसी के चिकित्साधीक्षक डॉ. रामनिवास ने बताया कि होली की छुट्टी की वजह से शुक्रवार को मरीजों की भीड़ ज्यादा रही। सभी मरीजों की जांच कर उपचार दिया गया। सीएचसी में मरीजों के लिए पर्याप्त मात्रा में दवा उपलब्ध है।
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बिजली बाधित होने से एक्सरे कक्ष में रही भीड़
शामली। सीएचसी में शुक्रवार को एक्सरे कराने वाले मरीजों की भीड़ रही। एक्सरे का समय दो बजे तक रखा गया है, लेकिन शुक्रवार को तीन बजे तक सौ से अधिक मरीजों के एक्सरे हुए। बिजली जाने से एक्सरे का कार्य बाधित हुआ, जिससे एक्सरे कराने के लिए लिए मरीजों को इंतजार करना पड़ा।
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तीन गर्भवती महिलाओं को चढ़ाया रक्त
प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व योजना के तहत हर माह की नौ तारीख को उच्च जोखिम गर्भावस्था दिवस (एचआरपी डे) मनाया जाता है। इस दिन सीएचसी पर गर्भवती महिलाओं की जांच कर उपचार दिया जाता है और उच्च जोखिम वाली गर्भवती महिलाओं को चिन्हित कर उनकी विशेष देखभाल की जाती है। बृहस्पतिवार को अवकाश होने के कारण शुक्रवार को इस दिवस पर गर्भवती महिलाओं की जांच की गई। सीएचसी शामली में महिला चिकित्सक पूजा ने करीब 90 गर्भवती महिलाओं की जांच की, जिनमें तीन गर्भवती महिलाओं में हीमोग्लोबिन सात से कम पाए जाने पर रक्त चढ़ाया गया और 13 महिलाओं को आयरन सुक्रोज दिया गया।